आरक्षण क्या है

आज ये समस्या आई है,
कुछ लोगों में असन्तोष लायी है।
आरक्षण को गलत साबित करने,
दलीलों की बाढ़ आई है।।
       पहले जानो तो              आरक्षण क्या है,
समझो तो आरक्षण क्यों है।
  आरक्षण तो व्यवस्था वह है,
समानता की क्रांति ज्यूँ है।
आरक्षण क्यों है उसे बताऊं
आरक्षण किसको है उसे बताऊँ
उससे पहले आप सभी को, 
आरक्षितओं का इतिहास सुनाऊं 


आरक्षण है उस वर्ग को जो 
              5000 वर्षों से गुलामी में गलित है 
              है वो वह समाज का अभागा वर्ग 
               कहलाता जो दलित है 
पहले अछुतपन झेलनी पड़ी 
शिक्षा ज्ञान से रहे जो दूर 
देवदासी बनाने के लिए जिनकी 
बहन बेटियों को किया मजबूर 
                 जिनकी कोई देवी नही हुई 
                 जिनका न रहा कोई देवता 
                 इन मिथकों के झंझाल में फसकर 
                 अत्याचार रहा जो झेलता   आरक्षण है उस वर्ग को जो                      5000 वर्षों से गुलामी में गलित है                 है वो वह समाज का अभागा वर्ग            कहलाता जो दलित है  
                 तुलसीदास भी कह चले
                 ढोल, ढवार ,पशु, शुद्र और नारी 
                 सकल ताड़ना के अधिकारी 
                 कितना सही था उनका कहना 
                 बताएंगे देश के नर व नारी 
थूकना जिनको भी मना था 
चलना बांध गले मे मटका 
पद चिन्ह भूमि पर न पड़े 
पीछे जिनके झाड़ू था लटका 
                 पानी पीने को न मिलता था 
                 तालाबों में भी बंदित हुआ 
                 केवल जन्म के आधार पर 
                दलित वर्ग कलंकित हुआ 
इन अत्याचारो से बचाने 
कई महापुरुष धरा में आये 
उनमें एक महापुरुष ऐसा था
संविधान जिन्होंने भारत का बनाया 
बाबा साहेब कहलाया था 
                  जीवन उनका आसान न था 
                  पग पग जातिवाद सहते रहे 
                 अपने अरमानों को साबित करने 
                 कक्षा से बाहर पढ़ते रहे 
पूना पैक्ट जब बाबा ने लाया 
गांधीजी विरोध में थे 
दलील का सुनिए एक राग
कहते गए कहते रहे 
दलित हिन्दू का भाग है  
                 हिन्दू दलित को कितना मानता
                 उसे आपको बताता हूँ 
                उससे पहले हिन्दू दलित रिश्ते की
                कहानी आपको सुनाता हूँ 
पशु मूत्र पीना जिनको भाता 
दलित का छूना पाप है 
क्या वास्तव में दलित हिन्दू का हिस्सा 
फिर ये कैसा विरोधाभास है
                  पत्थर मूर्ति की सेवा के लिए 
                  देवदासियां बनायी गयी
                  पुजारियों के दुष्कर्म से जो 
                  जिंदगी भर सतायी गई 
आरक्षण संबंध वर्ग विशेष से नहीं 
आरक्षण का कारण हिन्दू धर्म की जाति है 
समाज मे जो जन्म के आधार पर 
किसी को अछुत, किसी को सछुत बनाती है 
                   हमे तो आरक्षण 33% है 
                    67% फिर भी शेष है 
                   मंदिर का 100% आरक्षण 
                   तुम लोगो के भेष है 
फिर भी किसी पद को पाने में 
हमें योग्यता साबित करनी पड़ती है
नहीं मिलती है जन्म के आधार पर 
जैसे तुम लोगो को मिलती है
                 झांको अपने गॉव गलियारों में
                 तुमने कितनी इंसानियत रखी है 
                  सभी की समानता के लिए 
                  बाबा साहेब ने सोच समझकर  
                  आरक्षण व्यवस्था रखी है 
आरक्षण मिटाने को सब कहते 
जातिवाद की न करता कोई बात 
पहले मिटाओ जातिवाद को 
तब चलना साथ साथ है


नाम-: अखिलेश कोनाल भारतीय विद्यार्थी मोर्चा बड़कोट।
            महासचिव B.V.M BARKOT


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