बौध्द स्पूत 84 हजार

लोकेशन: ग्राम - पकड़ी, परगना - देवगाँव, तहसील - लालगंज, जनपद - आजमगढ़, राज्य - उत्तर प्रदेश।


सूचक: दिवाकर बौद्ध, आजमगढ़।


आजमगढ़ से 40 किमी दक्षिण दोना नदी के तट पर हथियादह है। हथियादह अचानक देवदह की स्मृति कराता है।


देवदह गौतम बुद्ध की माँ का नैहर था। " दह " जलाशय का बोधक है। दह बोधक गाँव - नगर जलाशय तट पर हुआ करते थे।


हथियादह के आसपास कई टीले हैं। टीलों में दबी प्राचीन ईंट की दीवारें हैं। खंडहर हैं।


खंडहर से एक बिस्वा की दूरी पर पत्थर का हाथी है। हाथी का आकार अशोक स्तंभ के शीर्ष पर स्थित पशुओं की मूर्तियों के आकार से मेल खाता है।


खंडहर से तीन बिस्वा की दूरी पर घिसा - टूटा कोई 12 फीट ऊँचा स्तंभ है। स्तंभ एकाश्मक पत्थर का बना हुआ गोलाकार है। एकाश्मक और गोलाकार स्तंभ मौर्य काल की खासियत है।


स्तंभ पर नागरी लिपि में अभिलेख है। सबसे ऊपर संवतसर लिखा है। यह अभिलेख किसी दूसरे का है।


सम्राट अशोक के स्तंभ पर कई दूसरे राजाओं ने भी अपने अभिलेख खुदवाए हैं। मिसाल के तौर पर, इलाहाबाद किले में मौजूद अशोक स्तंभ पर समुद्रगुप्त से लेकर जहाँगीर कालीन तक के लेखन हैं।


निश्चित, हथियादह के स्तंभ पर नागरी में लेखन है। मगर मूल स्तंभ अशोक का है। स्तंभ पर नागरी लेखन के आखिरी दौर में अनेक नागरी अक्षर वस्तुतः ब्राह्मी लिपि के लेखन पर ओवरराइटिंग हैं।


आप लाल घेरे में धम्म लिपि के अक्षर न, क, ड आदि को पढ़ सकते हैं। अक्षर न, क, ड एकदम अशोक की धम्म लिपि में है, अशोक की शैली में है- एकदम वर्गाकार!


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