देश के अन्दर क्या परम्परा चल रही है जाने

देश के दलालों के खिलाफ बोलने का माद्दा सिर्फ जेएनयू में है इसलिए दलाल मीडिया कंगारू कोर्ट बनकर देशद्रोह के सर्टिफिकेट बांट रहा है!


आज देश मे विपक्ष नहीं है।विपक्ष के नाम पर कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के रास्ता भटके गधे है और उनके पीछे गुलाम भेड़ों के झुंड!


जब इंदिरा गांधी आज का मोदी बनने की राह पर थी तब डॉ लोहिया ने कहा था "जब सड़के खामोश हो जायेगी तो संसद आवारा व बांझ हो जाएगी"।


लोकतंत्र भरोसे व विश्वास पर चलता है।संसद ने इस देश का भरोसा खोया है।न्यायपालिका इंसाफ देती नजर नहीं आ रही है और कार्यपालिका निजीकरण की योजना बनाने व राष्ट्रीय संपदा बेचने में व्यस्त है!


मीडिया से अपेक्षा थी कि जरूरी व सत्य सूचना आमजन को देगा मगर मीडिया सत्ता-पूंजी में डूबकर जनता का कातिल बन गया है।


लोकतंत्र के चार स्तंभ कहे जाते है।विधायिका,कार्यपालिका,न्यायपालिका व मीडिया!जब चारों स्तंभ ही भर-भराकर गिरते नजर आएं तो आमजन अपने सपनों,उम्मीदों,अरमानों का आशियाना कहीं और ढूंढने लगता है।ऐसे माहौल में जेएनयू खड़ा होता है!


याद रखिये!दुनियाँ भर में जितनी भी बर्बादी आई है वो तानाशाहों द्वारा शिक्षण संस्थानों को बर्बाद करने के बाद आई है!


हिटलर ने तमाम जर्मन शिक्षण संस्थाओं में राष्ट्रवाद का जहर घोलकर बर्बाद किया था और फ्रांस पर हमला करते ही पहले निशाने पर पेरिस यूनिवर्सिटी थी।


1975 में जब इंदिरा गांधी तानाशाही पर उतरी थी तब जेपी व लोहिया के साथ छात्र खड़े हुए थे।आज कोई जेपी खड़ा नहीं है,आज कोई लोहिया खड़ा नहीं है मगर लालू-मुलायम सरीखे लोग बहुतायत में बैठे है।


डॉ लोहिया या जेपी जैसे लोगों को यह जेएनयू खड़ा करेगा और देश के तमाम क्रांतिकारी युवाओं को एक साथ खड़ा यह जेएनयू करेगा।


चाहे abvp की एंट्री कराकर सरकार अपनी हार को छुपाने की लाख कोशिश कर लें मगर यह संघर्ष देश के आमजन को राह दिखा चुका है!


प्रेमाराम सियाग