एक पुरानी झलक चंम्बल की शेरनी क्या नाम है । जाने


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अमीर दलित दामाद रिश्तेदार और गरीब दलित नक्सली अछूत क्या गजब की पॉलिटिक्स है आज मै दोगली राजनीति से वाकिफ करवाता हूँ 
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गर्व से कहो हम शूद्र हैं
देश के अन्दर क्या परम्परा चल रही है जाने
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धर्मिक स्त्रियां धर्म के इन आदेशो को कितना सही मानती हैं ? आज भी समाज में विधवा स्त्री का बहुत ज्यादा सम्मान नहीं होता है ,अधिकतर विधवा स्त्री को अपशकुन ही समझा जाता है ।आप वृन्दावन सहित देश के बहुत से हिस्सों में विधवाओ के लिए बने आश्रमो में देख सकते हैं की उनकी क्या दुर्दशा होती है । इस बार वृंदावन में विधवाओ ने सैकड़ो साल की कुरीति तोड़ते हुए होली मनाई । अंग्रेजो के आने से पहले सती प्रथा समाज में कितनी प्रचलित थी यह बताने की जरुरत नहीं है , समाज में विधवा स्त्रियों को जला के उन्हें देवी मान लिया जाता था । समाज में विधवाओ के प्रति यह क्रूरता आई कैसे ?कौन था विधवाओं की दुर्दशा का जिम्मेदार ?जानते हैं - महाभारत के आदिपर्व में उल्लेख है की जिस प्रकार धरती पर पड़े हुए मांस के टुकड़े पर पक्षी टूट पड़ते है , उसी प्रकार पतिहीन स्त्री पर पुरुष टूट पड़ते हैं । स्कन्द पुराण के काशी खंड के चौथे अध्याय में कहा गया है "विधवा द्वारा अपने बालो को संवार कर बाँधने पर पति बंधन में पड़ जाता है अत:विधवा को अपना सर मुंडित रखना चाहिए। उसे दिन में एक बार ही खाना चाहिए वह भी काँसे के पात्र में , या मास भर उपवास रखना चाहिए । जो स्त्री पलंग पर सोती है वह अपने पति को नर्क डालती है , विधवा को अपना शरीर सुगंध लेप साफ़ नही करना चाहिये और न ही श्रंगार करना चाहिए । उसे मरते समय भी बैलगाड़ी पर नहीं बैठना चाहिए , उसे कोई भी आभूषण तथा कंचुकी नहीं पहननी चाहिए कुश चटाई पर सोना चाहिए और सदैव श्वेत वस्त्र पहनने चाहिए ।उसे वैशाख , कार्तिक और माघ मास में विशेष व्रत रखने चाहिए । उसे किसी शुभ कार्य में हिस्सा नहीं लेना चाहिए और हमेशा हरी का नाम जपना चाहिए । विधवा का आशीर्वाद विद्वजन ग्रहण नहीं करते मानो वह कोई सर्प विष हो । विधवाओं के प्रति यह आदेश धर्म का है , आज भी स्त्रियां ही सबसे अधिक धर्मिक प्रवृति की होती हैं ...यदि स्त्रियां धर्म का साथ छोड़ दें तो धर्म नाम की दुकान एक दिन में बंद हो जायेगी । तो आज की धर्मिक स्त्रियां, विधवाओं के प्रति धर्म के इन आदेशो को कितना सही मानती हैं ? - केशव (सजंय)..
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"ट्रेन की जंजीर" एक वृद्ध ट्रेन में सफर कर रहा था, संयोग से वह कोच खाली था। तभी 8-10 लड़के उस कोच में आये और बैठ कर मस्ती करने लगे। एक ने कहा, "चलो, जंजीर खीचते है". दूसरे ने कहा, "यहां लिखा है 500 रु जुर्माना ओर 6 माह की कैद." तीसरे ने कहा, "इतने लोग है चंदा कर के 500 रु जमा कर देंगे." चन्दा इकट्ठा किया गया तो 500 की जगह 1200 रु जमा हो गए. चंदा पहले लड़के के जेब मे रख दिया गया. तीसरे ने बोला, "जंजीर खीचते है, अगर कोई पूछता है, तो कह देंगे बूढ़े ने खीचा है। पैसे भी नही देने पड़ेंगे तब।" बूढ़े ने हाथ जोड़ के कहा, "बच्चो, मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है, मुझे क्यो फंसा रहे हो?" लेकिन किसी को दया नही आई। जंजीर खीची गई। टी टी ई आया सिपाही के साथ, लड़कों ने एक स्वर से कहा, "बूढे ने जंजीर खीची है।" टी टी बूढ़े से बोला, "शर्म नही आती इस उम्र में ऐसी हरकत करते हुए?" बूढ़े ने हाथ जोड़ कर कहा, "साहब" मैंने जंजीर खींची है, लेकिन मेरी बहुत मजबूरी थी।" उसने पूछा, "क्या मजबूरी थी?" बूढ़े ने कहा, "मेरे पास केवल 1200 रु थे, जिसे इन लड़को ने छीन लिए और इस लड़के ने अपनी जेब मे रखे है।" अब टीटी ने सिपाही से कहा, "इसकी तलाशी लो". लड़के के जेब से 1200रु बरामद हुए. जिनको वृद्ध को वापस कर दिया गया और लड़कों को अगले स्टेशन में पुलिस के हवाले कर दिया गया। ले जाते समय लड़के ने वृद्ध की ओर देखा, वृद्ध ने सफेद दाढ़ी में हाथ फेरते हुए कहा ... "बेटा, ये बाल यूँ ही सफेद नही हुए है!" 😁😁😁😁😁😁 अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस की बधाई 🙏
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