JNU जेनयू का आंदोलन

JNU को गाली देनेवालों के नाम खुला पत्र
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JNU का विरोध करना इन दिनों फैशन हो गया है। पढ़ने की बात छोड़ दें, कभी JNU कैंपस नहीं जाने वाले अनपढ़, अर्धशिक्षित और मैट्रिक, इंटर फेल भी इन दिनों JNU जैसे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के खिलाफ नफरत भरा अभियान चला रहे हैं। इसे देशद्रोही संस्था और ना जाने क्या-क्या घोषित कर रहे हैं। ऐसे लोगों के नाम आज यह खुला पत्र लिख रहा हूं।
JNU भारत ही नहीं, दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटी में से एक है। ये सिर्फ मेरा ही नहीं मोदी सरकार का भी यही मानना है। इस यूनिवर्सिटी ने देश-दुनिया को हजारों रिसर्च स्कोलर, आइएएस, आइपीएस, आइएफएस, लेखक, पत्रकार, प्रोफेसर, ब्यूरोक्रेट्स, नेता, मंत्री, थिंक टैंक दिए हैं और दे रहे हैं। वर्तमान में मोदी सरकार भी JNU के थिंक टैंक की सलाह से ही चल रही है। अगर विश्वास नहीं हो तो जरा मोदी सरकार में जेएनयू की स्थिति जान लें या पता कर लें।
अंध भक्तों आपको जानकर हैरानी होगी कि मोदी सरकार को चलाने वालों में ज्यादातर लोग जेएनयू के ही पास आउट हैं। सबसे अहम मोदी सरकार की विदेश नीति तय करने वाले विदेश मंत्री एस जयशंकर जेएनयू के पास आउट हैं। इस सरकार की बेहद शक्तिशाली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जेएनयू से हैं। पूर्व मंत्री सांसद नेहरू-गांधी परिवार की बहू और बीजेपी की नेता मेनका गांधी जेएनयू से ही शिक्षा ग्रहण कर चुकी हैं। भाजपा के ढेर सारे शीर्ष नीति निर्माता जेएनयू से हैं और भक्त लोग जेएनयू को गाली दे रहे हैं, जेएनयू को देशद्रोही साबित कर रहे हैं।
स्वामी विवेकानंद फॉउंडेशन जिसे बीजेपी-आरएसएस का थिंक टैंक माना जाता है, जिसके पहले अध्यक्ष अजित डोभाल जी थे, उसके वर्तमान अध्यक्ष जेएनयू के पूर्व छात्र अरविंद गुप्ता जी हैं जो इससे पहले भारत सरकार के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी थे। जेएनयू को पानी पी पी कर गाली देने वालों, आपको पता होना चाहिए कि पूर्व में देश के राष्ट्रपति ने जेएनयू को भारत के बेस्ट यूनिवर्सिटी का विशेष अवार्ड भी दे चुके हैं। मौजूदा उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू जी ने तो जेएनयू को एक्सीलेंस का पर्याय बताया है। भारत सरकार ही लगातार इसे सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज़ में कभी पहले, कभी दूसरे तो कभी तीसरे स्थान पर रखती है पर कुछ लोग जेएनयू को घटिया, कूड़ा, राष्ट्रदोही साबित करने पर तुले हैं। क्योकि अंध विरोधियों को देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मानव संसाधन मंत्रालय पर भरोसा नहीं है।
जेएनयू और इसके मूल्यों को गाली देने वालों, आप जेएनयू के छात्र रहे आईएएस दीपक रावत, आईपीएस मनु महाराज के वीडियो शेयर करते हैं, मगर जेएनयू को देशद्रोही बताते हैं। जेएनयू को देशद्रोह का केंद्र बताते हैं, मगर करता आपको नहीं पता कि नक्सल से लड़ने वाली आईपीएस संजुक्ता पराशर, देश के किसी भी राज्य के सीएम की पहली महिला सुरक्षा अधिकारी आईपीएस (असम मुख्यमंत्री के) सुभाषिनी शंकर जेएनयू की छात्रा रह चुकी हैं। मगर, अंध भक्तों आपको फुरसत नहीं मिलता की देश जोड़ने वाले और राष्ट्र निर्माण में जेएनयू के योगदान के बारे में जानें।
अंध भक्तों आंखें खोलो और किसी आइएएस अधिकारी से पता करो कि आईएएस प्रशिक्षण अकादमी, मसूरी से मास्टर इन पब्लिक मैनेजमेंट की डिग्री उन्हें कौन प्रदान करता है? भक्त भाई, देश के सारे आईएएस अधिकारियों को ये डिग्री उन्हें जेएनयू से मिलता है। अब देश के तमाम सैन्य अधिकारियों (NDA) से पूछो उन्हें देश की रक्षा करने की डिग्री कौन देता है? भक्त भाई सेना के अफसरों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की डिग्री भी जेएनयू से ही मिलता है, जिसके बाद ही वे भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी तक बनते हैं। 
देश की सर्वोच्च नीति निर्माण संस्था नीति आयोग जो कि पूरे देश के लिए योजना निर्माण में सबसे बड़ी संस्था हैं उसके सीईओ माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के सबसे प्रिय अधिकारियों में से एक अमिताभ कांत जी कहां से पढ़कर यहां तक पहुंचे हैं? भक्त भाई लोग अमिताभ कांत जी ने नीति निर्माण का ज्ञान जेएनयू से ही लिया था। जो आदमी समूचे देश के लिए नीति बना रहा है वह भी जेएनयू से है पर अंध भक्त भाई लोग जेएनयू को आतंकवादियों का अड्डा ही बता रहे हैं।
पूर्व आईबी चीफ और मोदी जी के विश्वासपात्र पश्चिम एशिया में भारत के काउंटर टेररिज़्म इंवॉय सैयद आसिफ इब्राहिम, हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव अली रज़ा रिज़वी जैसे जेएनयू से पढ़े मुस्लिम अधिकारियों की तो मैं चर्चा करना नहीं चाहता हूं, नहीं तो भक्त भाई लोग मुझे सांप्रदायिक करार दे देंगे।
भक्त भाई, एक बात जानकर तो आपको बेहद दुखद होगा कि आतंकी कसाब को फांसी दिलाने वाले चले अभियान 'ऑपरेशन X' के प्रणेता और महाराष्ट्र के पूर्व एडिशनल चीफ सचिव अमिताभ राजन जी के बारे में। अमिताभ राजन जी ने जेएनयू से ही सोशियोलॉजी में पीएचडी की है। उनके बारे में बात नहीं कर आप दिखाकर अफ़ज़ल गुरु गैंग के समर्थकों पर ही फोकस करेंगे। क्योंकि आपको विरोध के लिए जो विरोध करना है।  इसलिए भाई आपको अमिताभ राजन नहीं दिखेंगे। 
इस समय मोदी सरकार द्वारा नियुक्त नीदरलैंड के राजदूत वेणु राजमोनी, कोमोरोस के राजदूत अभय कुमार समेत 15 से ऊपर देशों के राजदूत, उच्च इंवॉय जेएनयू से हैं। मगर अंध भक्तों को जेएनयू देशद्रोह का केंद्र... वेश्यालय और ना जाने क्या क्या दिखता है।
हाल ही में नोबेल जैसे दुनिया के अतिप्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारतीय अभिजीत बनर्जी भी जेएनयू से थे पर अंध भक्त अभिजीत बनर्जी में देशद्रोह का अंश खोज रहे हैं। वर्ल्ड बैंक के आर्थिक विशेषज्ञ रंजीत नायक, नाबार्ड के पूर्व निर्देशक, आरबीआई के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर हारून रशीद खान जैसे आर्थिक विशेषज्ञों के बारे में अंध भक्त बात नहीं करेंगे।
इतिहास, समाजविज्ञान, भाषा, साहित्य संस्कृति, विदेश नीति के ढेर सारे लेखक एवं विशेषज्ञ जिनकी किताबे न सिर्फ भारत के विश्वविद्यालयों में बल्कि यूपीएससी की परीक्षाओं के लिए भी पढ़े जाते हैं; जेएनयू से पढ़े हैं।


A अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार 2019


B.  प्रो एल रामनाथन को हियोशी अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार, 2019


C. प्रोफेसर दिनेश मोहन को क्लेरिएटिव एनालिटिक्स इंडिया रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड 2019 मिला।


D. प्रोफेसर एन जे राजू को नेशनल ज़ियो साइंस अवार्ड 2019


E. किसी भी साहित्यकार को रूसी भाषा एवं साहित्य पर काम करने के लिए रूस का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अवार्ड पुश्किन मेडल जेएनयू की प्रोफेसर मीता नारायण को मिला।


F. डॉ दीपक गौर को 2017 का देश मे विज्ञान क्षेत्र का सबसे बड़ा अवार्ड शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार।


G. प्रोफेसर ऊमु सलमा बावा को यूरोपियन कमीशन का प्रतिष्ठित अवार्ड


H. प्रोफेसर गिरीश नाथ झा को संस्कृत भाषा के लिए अति प्रसिद्ध दत्त पीठ  अस्थाना अवार्ड


I. शोधार्थी स्नेहा राय को अमेरिका में 'कार्ल स्टॉर्म इंटरनेशनल डाइवर्सिटी अवार्ड' और अमेरिका की प्रोटीन सोसायटी ट्रेवल अवार्ड जो कि मॉन्ट्रियल कनाडा में दिया गया।


H. डॉक्टर ज्योति अटवाल (इतिहास विभाग जेएनयू) को आयरलैंड में जेंडर और ट्रांसनेशनल हिस्ट्री पढ़ाने हेतु पांच साल के लिए नियुक्ति


J. प्रोफेसर दिनेश मोहन मिसिसिपी, अमेरिका में तीन साल के लिए सहायक प्रोफेसर नियुक्त।


K. डॉक्टर सुनील कठेरिया को इनोवेटिव यंग बायोटेक्नोलॉजिस्ट अवार्ड


इतनी उपलब्धियों के बावजूद मेरे लिए जेएनयू देशद्रोह, आतंकवाद, अश्लीलता का अड्डा है, वहां के विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ कर सब करते हैं,पर विडम्बना देखिए कि वर्तमान मोदी सरकार के अनुसार ही यह देश के सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज में से है।


साथ ही, यह भी कहना चाहता हूं कि पूज्य स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति का अपमान करने वालों, देश विरोधी नारे लगाने वालों पर कठोर कारवाई जरूरी है। किसी भी शिक्षिका या महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार करने वालो पर भी कठोर कारवाई की जरूरत है, ऐसे लोगो को चिन्हित कर एक्शन लेने की आवश्यकता है। घाव होता है तो आप उस अंग को काट कर फेंक नहीं देते हैं, इलाज कराते हैं।


जो भी छात्र देश विरोध में संलिप्त पाए जाएं, राष्ट्र विरोधी नारे लगा रहे हों उनके खिलाफ कठोर कारवाई हो क्योकि 'राष्ट्र प्रथम' की अवधारणा जरूरी है। पर अपने देश के ही एक अति प्रतिष्ठित संस्था के खिलाफ बिना पढ़े, जाने बुझे अधकचरे विशेषज्ञों के ज्ञान के आधार पर राय न बनाएं।