राजनीतिक आरक्षण खत्म होना चाहिए क्यों जाने

*बहुजनों यदि आपको इस देश का शासक बनना है और अपनी समस्याओं से निजात पाना है तो इस संदेश को अवश्य पढ़ें और विचार करें साथ ही लोगों को मोटीवेट करें..*
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*वर्तमान में मनुवादी लोगों द्वारा बहुजनों को गुलाम बनाने के लिए क्या प्लान बनाएं है इसे समझने की आवश्यकता है..?*
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(राजनीतिक आरक्षण समाप्त होना चाहिए और क्यूँ..?


*देश में सभी निर्णय मनुवादियों के अनुसार आ रहे हैं तो एक निर्णय मैं चाहता हूं उस पर भी तुरन्त लिया जाए, बहुजनों का राजनीतिक आरक्षण सबसे पहले समाप्त होना चाहिए..?*


*मनुवादी सरकारें बहुजनों को समाप्त करने के लिए कई प्रकार से कार्य कर रही हैं लेकिन बहुजन समझ नही रहे..?*


*मनुवादी सरकारें बहुजनों का सारा हक़ अधिकार (शिक्षा,नौकरी आदि) छीनना चाहती हैं और उसे किसी न किसी रूप में छीन रही हैं लेकिन मनुवादी सरकारें राजनीतिक आरक्षण को वो बरक़रार रखना चाहती हैं, मनुवादी सरकारें राजनीतिक आरक्षण को इसलिए यथावत रखना चाहती हैं क्योंकि जो लोग देश के सर्वोच्च स्थान (संसद,राज्यसभा,विधानसभा) में पहुंच रहे हैं वो मनुवादी विचारधारा वाले दलों से पहुंच रहे हैं इसलिए जब बहुजनों पर अत्याचार होता है या वर्तमान में हो रहे प्राइवेटाइजेशन के माध्यम से बहुजनों के हक अधिकार छीने जा रहे हैं और ये किसी प्रकार से आवाज नही उठा रहे हैं, ना ही कभी उठाएंगे क्योकि वो अपने दलों से ऐसे लोगों को चुनकर भेजते हैं जो कभी बोल ही न सकें...?*


*बहुजनों को कम्युनल अवार्ड मिलने से गांधी जी अनशन में बैठ गए और गांधी के अनशन के बाद राजनीतिक आरक्षण पर सहमति बनी तो बाबा साहेब ने राजनीतिक आरक्षण का विरोध 1932 में ही किया था और समाज के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी और कहा था अब संसद में शेर नही, चमचे गीदड़ जाएँगे और समाज पर हो रहे अत्याचार को देखकर तालियां बजायेंगे, और आने वाले भविष्य को चमचायुग कहा और वर्तमान में यही हो रहा है तमाम बहुजन लोग मनुवादियों की चमचागीरी कर रहे हैं जो साफ आंखों से दिख रहा है..*


*राजनीतिक आरक्षण का विरोध मान्यवर साहेब ने भी किया ताकि चमचायुग को समाप्त किया जा सके..*


*वर्तमान में देखा जाए तो मनुवादियों के यहां बहुजनों के चमचों की कतारें लगी हैं और ये बहुजन समाज उनके साथ मिलकर अपने आने वाली पीढ़ी का गला दबा रहा है..*


मनुवादी सरकारें अभी राजनीतिक आरक्षण क्यों नहीं समाप्त करना चाहती,उन्हें पता यदि पहले हमने राजनीतिक आरक्षण समाप्त किया तो जो ये आज बहुजन समाज के लोग हमारे यहां चमचागीरी कर रहे हैं फिर ये अपने स्वार्थ को साधने के लिए अपने बहुजन समाज के साथ सड़कों पर उतर आएंगे और ये शासक बन जाएंगे, फिर जो हम पुनः इन्हें गुलाम बनाना चाहते हैं न बना पाएंगे इसलिए पहले इनकी शिक्षा छीनों *(शा विद्द्यालयों,महाविद्यालय को कमजोर करना व प्राइवेटों को बढ़ावा देना व उनकी उच्च फीस रखना ताकि बहुजनों के बच्चे शिक्षित न हो सकें)* नौकरियाँ छीनों सभी सेक्टरों को स्वामित्व के हाथ मे सौंपकर (प्राइवेटीकरण द्वारा) ताकि ये आर्थिक रूप से कमजोर व अशिक्षित हो जाएं इसके बाद राजनीतिक आरक्षण समाप्त कर, जो कार्य इनके पूर्वजों को हमारे पूर्वजों ने गुलाम बनाकर सौंपा था फिर पुनः इन्हें उसी स्थान व व्यवसाय पर हम पहुँचा देंगे, *जिसे बाबा साहेब ने समाप्त कर सबके हाथों में कलम पकड़ाई थी..*


*गौतम बुद्ध के बाद 5 सौ वर्षों बाद नन्द वंश,मौर्य वंश के समय बहुजनों को लीडर मिले इनके समाप्त होते ही कई हजारों वर्षों तक बहुजनों को लीडर न मिल सकें जो भी तैयार होते थे मनुवादियों द्वारा उन्हें मार दिया जाता था फिर जब अरब के लोगों का भारत पर आक्रमण शुरू हुआ एवम मुस्लिमों का साम्राज्य भारत मे स्थापित हुआ तब बहुजनों को पुनः लीडर मिलना शुरू हुए रविदास,कबीर लेकिन इनकी हत्या होने के बाद थोड़े थोड़े समय के लिए लीडर आते रहे लेकिन वास्तविक लीडर 3 सौ वर्ष बाद अंग्रेजों के समय ज्योतिबा फुले से मिलना शुरू हुए जहां से बहुजनों की सामाजिक लड़ाई को गति मिली और बाबा साहेब सामाजिक लड़ाई को लड़ते हुए भारत का संविधान लिखकर बहुजनों को सभी हक अधिकार दिला दिए, फिर मान्यवर कांशीराम साहेब व उनकी टीम ने बहुजनों को शासक बनाने के लिए संघर्ष शुरू किए और बहन मायावती आज उस सामाजिक मिशन को लेकर आगे बढ़ रही हैं लेकिन मनुवादियों ने इतने चमचे तैयार कर लिए हैं कि वो चमचे लोग उन्हें आगे बढ़ने नही दे रहे हैं समाज का सौदा करके..*


*बहुजनों अपने दिमाग की बत्ती जलाओ आपको लीडर तभी मिलें हैं जब जब भारत पर विदेशी आक्रमण हुए हैं लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इतने संगठन बन गए हैं कि अब किसी देश पर किसी अन्य देश का राज्य होना सम्भव नहीं है तो सोचो वर्तमान समय मे जो मनुवादी कार्य कर रहे हैं उनकी नीतियों को समझो और सोचो माननीया बहनजी के दुनिया से जाने के बाद पुनः बहुजनों कई हजारों वर्षों के लिए गुलाम बना लेंगे इसलिए वो शिक्षा से ज्यादा मन्दिरों को स्थापित करने के लिए कार्य कर रहे हैं ताकि हम अशिक्षित होकर भाग्य के भरोसे हो जाएं कि भगवान ने हमारी किश्मत में ये लिखा ही है और ये कार्य करना हमारा धर्म है..*


*समय बहुत कम बचा है यदि समझ सकते हो तो समझ लो जो समाज हमारे महापुरुषों व बहनजी ने मिलकर बनाया है लेकिन मनुवादी सरकारें जातीय संगठन बनाकर हमें पुनः अलग कर दिया गया है ताकि हम एक न हो सकें और मनुवादी सरकारों से अपनी जाति के लिए टुकड़ों की मांग करें और उनके टुकड़ों में पलटे रहें और हमेशा अपने जाति के लोग का साथ देने की मानसिक प्रवित्ति बन जाये चाहे वो हमारे हक अधिकार को समाप्त करने में मनुवादियों की सहायता ही कर रहा हो और जब हम अपनी जाति देखकर उसकी सहायता कर रहे है हमारी जाति का है तो मनुवादियों को कम समय मे हमें गुलाम बनाने का मौका मिल रहा है क्योकि जाति के व्यक्ति को स्थापित करने के लिए पूरा जातीय समाज व जातीय संगठन लगा है इसलिए जाति व जातीय संगठन तोड़कर जातीय मोह से बाहर निकलकर अपने आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करने के लिए बहुजन बनकर माननीय बहनजी का साथ दें ताकि बहुजनों को कभी कोई गुलाम न बना सके और बहुजन इस देश मे मानवता कायम कर सकें..*


*बहुजनों के बहुत से राजनीतिक दल बने हैं व कुछ सामाजिक संगठनों का नाम देकर अपने आपको बहुजनों का सच्चा लीडर व हितैसी बता रहे हैं उन बहरूपियों पर विश्वास न करें वो किसी न किसी रूप में मनुवादियों की ही मदद कर रहे हैं ताकि बहुजन इस सदी में शासक न बन सकें वो सिर्फ बहनजी से द्वेष रखने के कारण ऐसा कर रहे हैं..*


*बहुत से ऐसे राजनीतिक दल बने हुए हैं जो बहुजनों ने बनाया है वो सत्ता में भी आ रहे हैं लेकिन क्यूँ आ रहे है या उनके कंडीडेट चुनाव क्यों जीत रहे हैं और बसपा क्यूँ लगातार चुनाव हार रही है और उसे हरवाया जा रहा है ये समझने की जरूरत है ऐसा क्यूँ हो रहा है..?*


*ऐसा इसलिए हो रहा है कि बसपा को छोड़कर सभी दलों के बहुजन लीडर मनुवादी व्यवस्था को अपनाए हुए हैं और मनुवाद को बढ़ावा देने के लिए वो मनुवादी स्थलों में जा रहे है और दान कर रहे हैं,  मनुवाद को मजबूत कर रहे है लेकिन बसपा ऐसा नहीं करती है बसपा बहुजनों के इतिहास को जिंदा कर रही है ताकि बहुजन अपना इतिहास देखकर शासक बनने के लिए सदैव प्रेरित रहे और अपने इतिहास को जानते रहें इसलिए बसपा का विरोध सबसे ज्यादा बहुजनों से ही कराया जा रहा है ताकि बसपा समाप्त हो जाये तो इनका सामाजिक व शासक बनने का आंदोलन समाप्त हो जाये और इन बहुजनों को पुनः मनुवाद का गुलाम बनाया जा सके साथ ही ये मनुवादी सरकारें बहुजनों के इतिहास को पुनः दबा सकें और इतिहास दबाकर बहुजनों को आसानी से गुलाम सदियों तक गुलाम बना लें..*


*बसपा ही देश के अंदर एक ऐसी पार्टी है जो सामाजिक परिवर्तन की बात करती है और जातिपात भेदभाव समाप्त कर मानवतावादी समाज का निर्माण करना चाहती है और यदि बसपा एक बार केंद्र में आ गई तो वो ऐसा कर देगी और हमेशा के लिए मनुवाद को समाप्त कर बहुजनों को शासक बना देगी और ये बहुजन समाज सदियों के लिए शासक बन जाएंगे, बसपा ही एक ऐसा दल है जो वर्तमान में बहुजनों के भविष्य की दिखने वाली गुलामी से बचा सकती है इसलिए जातीय धर्म का मोह छोड़ बसपा को मजबूत करने में तन मन धन से लग जाएं और अपने भविष्य को मनुवादी जातीय कर्म आधारित व्यवस्था से बचा लें..*


*सभी बहुजनों के राजनीतिक दल मनुवाद को सहयोग करते हैं व उनकी विचारधारा को मानते हैं सिर्फ बसपा ही एक ऐसा दल है जो मनुवाद की विचारधारा के विरोध करती है इसलिए मनुवादी तो बसपा को समाप्त कर ही रहे हैं, साथ ही बसपा को समाप्त करने के लिए कई बहुजनों को खड़ा कर दिए हैं ताकि बसपा संसद तक न पहुंच सके और ये बहुजन समाज सदियों से मूर्ख रहा इसलिए गुलाम बना रहा, किसी तरह से महापुरुषों व बहनजी के प्रयास से शासक बनने की स्थिति में पहुंचा तो वर्तमान में पुनः मूर्खता शुरू कर दिया है और बसपा व बहनजी का विरोध कर अपनी गुलामी को निमंत्रण दे रहा है मनुवादी को संसद में पहुंचाकर..*


*अब तक समझ चुके होंगे राजनीतिक आरक्षण क्यों समाप्त होना जरूरी है क्योंकि इसके रहने से हमारे वास्तविक लीडर संसद में नही पहुंच पा रहे हैं, जो समाज की लड़ाई संसद में लड़ सकें इसलिए इसके रहते सम्भव नहीं है जब तक ये रहेगा चमचा तैयार होते ही रहेंगे जरा सोचें जिन्होंने अधिकार दिलाया बाबा साहेब व कांशीराम साहेब को चुनाव हराया गया और मनुवादी विचारधारा के लोगों को संसद में पहुंचाया गया और आज मनुवादी चमचा लोगों को ही पहुंचाया जा रहा है..*


*अब ये भी समझ चुके होंगे बसपा क्यों चुनाव नही जीत पा रही है और बहनजी के बहुजन समाज के लोग ही इतने विरोधी क्यों है, जब बाबा साहेब के हो सकते हैं उन्हें चुनाव हरा सकते हैं और इन्हीं चमचो ने बाबा साहेब को आजादी के बाद संसद नही पहुंचने दिए तो आज इन बहुजनों के साथ मिलकर तो बहनजी के साथ क्यों नहीं, इसे समझो मेरे बहुजन भाइयों और बहनजी को बाबा साहेब की तरह धोखा मत देने दो इन चमचों का साथ देकर...*


*इसलिए अपने इतिहास को समझते हुए उस गलती को न दोहराएं किसी के बहकावे व चक्कर में न फंसे सिर्फ अपने दिल और दिमाग मे बसपा व बहनजी को बसा लें और इस सामाजिक परिवर्तन के मिशन को आगे बढ़ाते चलें..*


*एक कहावत है:- इतिहास अपने आपको दोहराता है लेकिन कौनसा भारत में इतिहास दोहरा रहा है ये भी समझने की जरूरत है, प्राइवेटीकरण व चंद टुकड़े फेंककर बहुजनों को गुलाम बनाने का इतिहास दोहराने वाला है अगर इसके दोहराने से बचना है तो बसपा व बहनजी का साथ देकर बचा लो, नही तो इसी तरह टुकड़े में बंटकर इंतज़ार करो उस दिन का जो आज से 70 वर्ष पहले थे..*


*अब मेरे बहुजन साथियों सबकुछ आपके हाथ में है सोच समझ लीजिए बसपा व बहनजी का साथ देकर सदियों के लिए शासक बनाना है या बसपा व बहनजी का विरोध कर मनुवादियों का साथ देकर, टुकड़ों में बंटकर उनकी गुलामी स्वीकार्य करेंगे..*


*बहुजनों की गुलामी शुरू हो गई है लेकिन अभी वो पूर्ण रूप से दिख नही रही, जब दिखेगी तब ये बहुजन समाज कुछ कर ना पायेगा, दिखाई इसलिए नही दे रहे यदि कोई परिवर्तन अचानक होता है तो लोग आन्दोलित हो जाते हैं इसलिए वो अपने तरीके से आ रही है ताकि जब दिखने लगे तो कोई विरोध करे तो उसे फांसी पर लटका दिया जाए ताकि दूसरा विरोध करने की हिम्मत न कर सके...*


*अभी भी वक्त है बसपा व बहनजी का साथ देकर इन 5 वर्षों में सभी राज्यों व केंद्र में इस सामाजिक परिवर्तन के मिशन को शासन में पहुंचाकर शासक बन जाएं अन्य बहरूपी सामाजिक व राजनीतिक दल व मनुवादियों की चमचागीरी छोड़कर...?*


*बहुजनों आपके पास सिर्फ एक ही विकल्प है, वो है बसपा व बहनजी, यदि आप दूसरा विकल्प सोच रहे हैं और तैयार कर रहे हैं तो ये मानकर चलिए आपकी गुलामी तय है इसलिए किसी नेता,दल,संगठन की बातों में न फंसे, न ही दूसरे विकल्प के बारे में इस समय सोचें, इस समय सिर्फ बसपा व बहनजी के बारे में सोचें और खुद को बहनजी व शासक समझते हुए कार्य करें..*


*समस्त बहुजन महापुरुष अमर रहें!*
*बाबा साहेब अमर रहें!*
*पेरियार साहेब अमर रहें!*
*मान्यवर साहेब अमर रहें!*


*बसपा जिन्दाबाद*
*बहनजी जिन्दाबाद*


*नमो बुद्धाय जय भीम जय भारत*
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             *निवेदक*
          *रावेंद्र कुमार*
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