सूद्र के कार्य

*भारतीय शूद्रों को समर्पित आरती संग्रह*


*शूद्र का आंटा, शूद्र का घी,*
*भोग लगाएं पंडित जी।*
*शूद्र बेचारे दान चढावैं,*
*मौज मनावैं पंडित जी।*
*पैदा हो जब शूद्र के बेटा,*
*नाम धरावैं पंडित जी।*
*आरक्षण से मिलल, नौकरी,*
*मनौती पुरावैं पंडित जी।*
*खेत बेंच मन्दिर बनवावैं,*
*पुजारी बनिगैं पंडित जी।*
*शूद्रन के चपरासी बनवावैं,*
*हाकिम बनिगै पन्डित जी।*
*कर्जा लेके घर बनावैं,*
*हवन करावैं पंडित जी।*
*मां-बाप को गाली देवें,*
*पैर दबवावें पंडित जी।*
*बाप के तेरहीं में खेत बिकल,*
*पूड़ी खावें पंडित जी।*
*माई के तेरहीं में घरवो बिकी गै,*
*गौदान करावैं पन्डित जी।*
*शूद्र जी घूमें मन्दिर तीरथ,*
*संसद जाएं पंडित जी।*
*शूद्र क लड़का काँवड़ ढोवै,*
*दिल्ली पढ़वावैं पन्डित जी।*
...
यह केवल अनपढ़ ग्रामीणों की बात नहीं है। पढ़े लिखे डॉक्टर, इंजिनियर, आईएएस, पीसीएस, वकील, जज, अध्यापक, नेता सबका यही हाल है। 
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