*NRC & CAB*

✳🔥::~ *NRC & CAB*~:: 🔥✳
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■ *NRC::~ राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर*
 .                *National Register of Citizens*


■ *CAB::~ नागरिकता संशोधन बिल*
.                 *Citizenship Amendment Bill*


"Citizenship Amendment Bill" is a bill, Passed in the Lok Sabha on 10 dec, 2019, amending the Citizenship Act of 1955.


बामसेफ ब्राह्मणों को विदेशी साबित कर रहा है....।।


आप क्या सोच रहे थे....कि आप ब्राह्मणों को विदेशी बोलोगे.... और ब्राह्मण आप पर पलट कर हमला नहीं करेंगे..???  


संघ ने NRC  लाकर ओबीसी, एससी, एसटी को उनके ही देश में विदेशी घोषित कर दिया. 


अकेले असम में 20 लाख लोगों को विदेशी घोषित किया गया है.... जिनमें से 14 लाख हिंदू हैं. 


अब आप समझ सकते हैं कि NRC हकीकत में किन लोगों को विदेशी साबित करने के लिए लाया जा रहा है....।।


NRC लागू करने के लिए जो  CAB लाया जा रहा है वो मुसलमानों को विदेशी साबित करके उनके वोट अधिकार को खत्म करने के लिए ही लाया जा रहा है.... ताकि ( obc sc st पिछड़ी जातियों ) की राजनीति को ठिकाने लगाया जा सके..।।


यूपी, बिहार, केरल, बंगाल में मुसलमान वोट बैंक बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल पैदा करता है। 


मुसलमान वोट के बल पर ही यूपी बिहार में पिछड़ों को सत्ता मिली है. इसलिए सबसे पहले मुसलमानों से उनका वोट अधिकार छीनना चाहती है भाजपा...।।


एक बार मुसलमानों से उनका वोट अधिकार छीन लिया.... फिर बाद में  CAB 2 लाकर  OBC, SC, ST को भी विदेशी साबित करके वोटिंग अधिकार छीना जाएगा....।।


हकीकत ये है कि संघ के इशारे पर ओबीसी, एसी, एसटी के लोगों को उनके अपने ही देश में विदेशी साबित करके उनसे वोट का अधिकार छीनने के लिए ही  NRC लाया जा रहा है.... जिसमें मुसलमान  तो सिर्फ चारा है....ताकि ओबीसी, एससी, एसटी का शिकार किया जा सके...जैसे असम में 14 लाख हिंदू ओबीसी, एससी , एसटी के शिकार के लिए 6 लाख मुसलमानों को चारे के रूप में इश्तेमाल किया गया है।


ब्राह्मणों ने  NRC लाकर दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों को उनके अपने ही देश में विदेशी बनाकर उनको कन्सन्ट्रेशन कैंप में कैद करके मारने का इंतजाम कर दिया।।


अकेले असम में 20 लाख लोगों को विदेशी बताया जा रहा है.... जिसमें से 14 लाख हिंदू हैं.  जिसमें कई लोग कैंप में मर गए हैं


और हिंदुओं में कौन होंगे.... इसका अंदाजा आप लोग आसानी से लगा सकते हैं....।।


NRC दलितों, पिछड़ों की हत्या के लिए ही लाया गया है।।


■ *काउंटर अटेक*👇👇👇


*एक बार आप अलग ब्राह्मण प्रदेश को मुद्दा बनाकर सड़क पर उतरिए, NRC, CAB, आरक्षण विरोध वगैरह तमाम मुद्दे खत्म हो जायेंगे और सघी ब्राह्मण गैंग बैकसीट ले लेगा।*


बस एक बार ट्राई करके देखो, आप उनके बेस के ऊपर अटैक नहीं करोगे तो आपके हर चीज पर अटैक करेंगे. जो वाकई संघी ब्राह्मण गैंग के रोज तीव्र होते हमले को रोकने के लिए गंभीर हैं उन्हें रोना छोड़कर आगे आना चाहिए। 


दूसरी कोई रणनीति उन्हें नहीं रोक सकती.


बात सीधी सी है कि~  आप हमारे साथ खुश नहीं हो तो अलग हो जाओ


*NRC::~ राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर*
*CAB::~ नागरिकता संशोधन बिल*


इस बिल में लोगो को अपनी नागरिकता का प्रूफ देना होंगा, जो नही सकेंगा उसको विदेशी घुषणखोर माना जायेगा. इस बिल से  ज्यादातर पूर्वोत्तर राज्यो के लोगो को effect करेगा, 


जो लोग अपनी नागरिकता का सबूत नहीं दे पाएंगे.... सबसे पहले उनसे वोट देने/नागरित्व/ रहने का का अधिकार छीना जाएगा....।।


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आपसे 1 कश्मीर संभल नही रहा है और अब नए नागरिकता संशोधन विधेयक से आप 7 नए कश्मीर बनाने जा रहे हैं.


बहुत कम लोगो को मालूम है कि इस नए नागरिकता संशोधन विधेयक का सबसे कड़ा विरोध "पूर्वोत्तर" में हो रहा है, पूर्वोत्तर भारत में इसके खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन शेष भारत का मीडिया इन प्रदर्शन को नजरअंदाज कर रहा है, 


*7 सिस्टर* कहे जाने पूर्वोत्तर के हर राज्य में इसके खिलाफ व्यापक असन्तोष है.


आपको इस बारे में यह समझने की जरूरत है कि "पूर्वोत्तर की शरणार्थी समस्या" कभी भी *"हिन्दू वर्सेज मुस्लिम"* नही थी, यह मुद्दा हमेशा से *"स्थानीय वर्सेज बाहरी"* ही रहा है.


सबसे अधिक चिंता की बात भी यही है कि::~  मूल रूप से NRC और CAB  में परस्पर विरोधाभास है. 


*NRC में धर्म के आधार पर शरणार्थियों को लेकर कोई भेदभाव नहीं है.*


NRC के मुताबिक, 24 मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से देश में घुसे अप्रवासियों को निर्वासित किया जाएगा. चाहे वह किसी जाति धर्म के हो. 


लेकिन भाजपा द्वारा लाये जा रहे इस नए नागरिकता विधेयक में बीजेपी धर्म के आधार पर शरणार्थियों को नागरिकता देने जा रहीं है, जिससे इस क्षेत्र के मूल निवासियों के अधिकारों का हनन होगा ओर एक नया संघर्ष पैदा हो जाएगा.


यह विधेयक नागरिकों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. *नागरिकता (संशोधन) विधेयक 1985 के ( "_ असम एकॉर्ड_" ) समझौते का उल्लंघन करता है.*


विधेयक में यह स्पष्ट नहीं है कि नागरिकता देने का आधार क्या होगा, और किस आधार पर नागरिकता देने के इनकार कर दिया जाएगा.


इस विधेयक में 2 पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में 'धार्मिक उत्पीड़न' का शिकार लोगों का जिक्र है. बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले छह अल्पसंख्यक समूहों- { हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई } को शामिल किया गया है.


*लेकिन श्रीलंका या म्यांमार से आने वालों को शामिल नहीं किया गया है. मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है.*


विधेयक में इसकी व्याख्या भी नहीं है कि किस आधार पर, किन आंकड़ों या विश्लेषणों के सहारे यह निष्कर्ष निकाला गया कि मात्र 2 देशों में विशेष धार्मिक समूह "धार्मिक उत्पीड़न" का शिकार हैं.


"नागरिकता संशोधन विधेयक" कहता है कि ::~ भारत में घुसपैठ करके आए "मुसलमानों के अलावा", बाकी सभी को भारत की नागरिकता दी जाएगी. 


यह विधयेक सभी विदेशी घुसपैठियों को बाहर करने का प्रावधान नहीं करता, यह सिर्फ मुसलमान घुसपैठियों को बाहर करने की बात करता है.


जिसके आधार पर देश भर में NRC लागू करने की बात की जा रही है सरकार की ओर से तैयार किया जा रहा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और असम समझौता ये दोनों धर्म को आधार नहीं मानते. 


ये दोनों किसी को भारतीय नागरिक मानने या किसी को विदेशी घोषित करने के लिए 24 मार्च, 1971 को आधार मानते हैं. 


असम समझौता बिना किसी धार्मिक भेदभाव के 1971 के बाद बाहर से आये सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया ठहराता है. 


जबकि नागरिकता संशोधन क़ानून बनने के बाद 2014 से पहले आये सभी गैर मुस्लिमों को नागरिकता दी जा सकेगी, *जो कि असम समझौते का उल्लंघन होगा.*


कल *सुप्रीम कोर्ट के वकील उपमन्यु हजारिका* ने आज तक के कॉन्क्लेव में कहा कि बांग्लादेश से आए मुस्लिमों को आपने एनआरसी से बाहर कर दिया, लेकिन बांग्लादेश से आए हिंदुओं को आप नागरिकता देने जा रहे हैं तो यह बेहद हास्यास्पद बात है.


वह आगे कहते हैं कि 'पूर्वोत्तर के मामले में अब यह नया "सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल" भारतीय नागरिकों से कह रहा है कि::~  आपके साथ जो हुआ उससे हमें कोई लेना-देना नहीं. 


बल्कि भारतीय नागरिकों की जगह उन विदेशी नागरिकों को प्राथमिकता देने जा रहा है जो बाहर से आए हैं. इसीलिए आज इसका विरोध हो रहा है'


दरअसल यह सारी योजना संघ की बनाई हुई है इस विधेयक के पारित होने के बाद देश मे हिन्दू ओर मुस्लिम के बीच एक ऐसी लकीर खिंच जाएंगी जो किसी के मिटाने से भी मिटा नही पाएगी.


यही संघ का असली एजेंडा है दरअसल असम में एनआरसी की फ़ाइनल सूची से जो 19 लाख लोग बाहर रह गए हैं, उनमें बड़ी संख्या में हिंदू शामिल हैं अब उन्हें जैसे तैसे कर के अंदर लेना है इसलिए इस विधेयक को बेहद फुर्ती के साथ पास कराने की कोशिश की जा रही है.


यदि इस बिल को लागू किया जाता है तो इससे पहले से अपडेटेड नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) बेअसर हो जाएगा ओर यही संघ ओर भाजपा का मूल उद्देश्य है


भाजपा पूर्वोत्तर में एक ऐसे संघर्ष को शुरू कर रही है. जो दूसरी कश्मीर समस्या को जन्म दे देगा और हिंसा और आतंकवाद का एक नया दौर शुरू हो जाएगा जिसकी आग बुझाए से नही बुझेगी.


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यह कोरा झूठ और प्रोपेगैंडा है कि आज़ादी के समय देश का बंटवारा हुआ. भारत देश ही 1947 के बाद बना है उससे पहले तो 500 से अधिक राज्यों में बिखरा हुआ था. जब देश ही 1947 में बना है, तब बंटवारा कैसा और इस बंटवारा के लिए मुसलमान कैसे दोषी हुआ? 


हाँ, बंटवारा पाकिस्तान और बंग्लादेश में हुआ था. 15 अगस्त, 1947 को जिस भारत देश का निर्माण हुआ था. 


हमारे भारतीय मुसलमान उसी भारत के नागरिक है और 26 जनवरी 1950 को जिस भारतीय संविधान को स्थापित किया गया था उसका पहला ही वाक्य "We the people of India that is Bharat" है। 


*CTR (  C + V )* 🙏