इंक़लाबी नजर

इंक़लाबी नजर 


इंकलाबी नजर इंक़लाब ढूंढती है,
हुकूमत से सवालों का जवाब ढूंढती है।
इंक़लाबी पूछता है कि
इस जुल्म का जिम्मेदार कौन है?
क्यों शोषितों की कौम मौन है?
किसने छीना हक हमारा?
किसने अछूत कहकर मारा?
किसने हम पर अत्याचार किया?
हमारी बहनों से व्यभिचार किया?
क्या भूल गए वर्तमान को?
हजारों वर्षों के इतिहास को?


नहीं नहीं कुछ भी ना भूलो,
पुरखों के दर्द को महसूस करो।
जागो रे बहुजन
तुम्हारा वक्त आने वाला है।
मनुवाद को दफ़्न कर
अंबेडकरवाद छाने वाला है।


बच्चा बूढ़ा नौजवान कहेगा सीना तान,
आगाज हूं मैं, इंकलाब हूं मैं,
अगर मनुवाद है तू तो अंबेडकरवाद हूं मैं।


- सूरज कुमार बौद्ध (हरिद्रोही)