<no title>बोधिसत्व_मानवता_के_मसीहा_भारतरत्न_बाबासाहेब  #डॉ_भीमराव_अंबेडकर_को_शत_शत_नमन_

#बोधिसत्व_मानवता_के_मसीहा_भारतरत्न_बाबासाहेब  #डॉ_भीमराव_अंबेडकर_को_शत_शत_नमन_
6दिसंबर 1956,आज ही के दिन हमे वो जिम्मेदारी सौंप के गये थे कि ऐ मेरे समाज के लोगों *''#मैं_बहुत_मुश्किल_से_इस_कारवां_को_इस_स्थितितक_लाया_हूं, #जहां_यह_आज_दिखाई_दे_रहा_है। #इस_कारवां_को_आगे_बढ़ने_ही_देना_है, #चाहे_कितनी_ही_बाधाएं_रुकावटें_या_परेशानियां_इसके_रास्ते_में_क्यों_न_आएं।#यदि_मेरे_लोग_मेरे_सेनापति_इस_कारवां_को_आगे_नहीं_ले_जा_सकें_तो_ #उन्हें_इसे_यहीं_इसी_दशा_में_छोड़_देना_चाहिए_परकिसी_भी_हालत_में_ #कारवां_को_पीछे_मोड़ने_की_अनुमति_नहीं_मिलनी_चाहिए।''*
*उन्होंने कहा, ''यही मेरा संदेश है और संभवतः अपने लोगों के लिए अंतिम संदेश है, जिसे मैं पूरी गंभीरता से दे रहा हूं और मैं निश्चिंत हूं कि इसकी अनसुनी नहीं होगी। जाओ और उन्हें बता दो, जाओ और उन्हें बता दो, जाओ और उन्हें बता दो।'' उन्होंने तीन बार दुहराया। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिये हमे संविधान रूपी वो मार्ग दिया हैं जिससे हम उनके समता,स्वतंत्रता,न्याय ओर बंधुत्व वाले प्रबुद्ध भारत का निर्माण इस देश के शासक बन कर सके ।