⚠️ हिन्दू कौन हैं?? ⚠️

⚠️ हिन्दू कौन हैं?? ⚠️


हिन्दू धर्म के अनुसार 4 वर्ण है जिसमें
👉 ब्राह्मण (जनरल) हिन्दू है 
👉 क्षत्रिय (जनरल) हिन्दू नहीं है, 
👉 वैश्य (जनरल) हिन्दू नहीं है, 
👉शूद्र (अनुसूचित जाति +अनुसूचित जनजाति +पिछड़ा वर्ग) हिन्दू नहीं है
👉 क्यों?? 
क्योंकि
 👉भारत में सबसे पहले आक्रमणकारी विदेशी आर्य ब्राह्मण लगभग 1500 ईसापूर्व आये थे।और ब्राह्मणों ने ही देश के मूलनिवासियों को जो लोग आर्थिक रूप से सम्पन्न थे उन्हें क्षत्रिय, वैश्य और गरीब और कमजोर लोगों शूद्र वर्ण बना कर आपस में बांट कर गुमराह किया और अपना मानसिक गुलाम बनाया क्षत्रिय और वैश्य को मुफ्त में ही ऊंच जाति होने का सम्मान मिल गया ईस प्रकार वे ब्राह्मणों के तलवे चाटने लगे और शूद्रों पर अत्याचार करने लगे इसके बाद शूद्रों को और 6743 ऊंच नीच भेदभावपूर्ण जातियों में बांट कर जानवर बना दिया जिससे कि शूद्र भी कभी आपस में एक न हो सकें। 
वेद, पुराण, भगवत गीता, रामायण, लिख कर उसको धार्मिक ग्रंथ बता कर लोगों को गुमराह कर दिया और मनुस्मृति नामक ग्रंथ लिख कर लोगों को जाति के हिसाब से कर्म का निर्माण कर दिया जिसे लोग अपना भाग्य मान कर और काल्पनिक भगवानों और देवी देवताओ जैसे कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश, दुर्गा, गणेश, काली, सरस्वती, राम, कृष्ण, हनुमान आदि फर्जी भगवानों और देवी देवताओ को बना कर लोगों के दिमाग में डर बनाया गया है और पूजा पाठ पाखंड व्रत और त्योहार बना कर ठगी और लूट पाट करके ब्राह्मणों ने अपनी कमाई करने का परमानेंट जरिया बना लिया है। 
🤔ब्राह्मणों के आतंकवाद का बिरोध सबसे पहले तथागत गौतम बुद्ध ने 563 ईसा पूर्व ही किया था जब भारत में सिर्फ ब्राह्मण धर्म था और बुद्ध धम्म था इसके  अलावा कोई भी धर्म नहीं था। 
👉 भारत में दूसरे विदेशी मुगल 711 ईसा बाद आये व्यापार के मकसद से।
👉 भारत में तीसरे विदेशी अंग्रेज 1608 ईसा बाद आये व्यापार के मकसद से।
🌺भारत में मौजूद ईसाई, मुस्लिम, सभी भारत के मूलनिवासी और बुद्धिस्ट है क्योंकि ब्राह्मणों के जातिवाद आडंबर और पाखंड के आतंकवाद से परेशान होकर ही ईसाई, मुस्लिम बने हुए हैं क्योंकि बौद्ध सम्राट बृहदत मौर्य का ब्राह्मण सेनापति पुष्य मित्र सुंग ने धोखे से हत्या कर दिया था और बौद्धों का कत्लेआम कराके ब्राह्मणों का राज स्थापित करके आतंकवाद फैला दिया था।
अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जातिवाद आडंबर और पाखंड का बिरोध किया था और ब्राह्मणों को जज बनने पर रोक लगा दिया था इसलिए ही बौखलाए ब्राह्मणवादी लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ मूलनिवासी शूद्रों को गुमराह किया और मूलनिवासियों ने अपने ही अधिकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 
आज भी भारत के मूलनिवासी OBC, SC, ST और मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन, सिख के बिरोधी और भारतीय संविधान के बिरोधी ब्राह्मण और मनुवादी लोग ही हैँ जो हिन्दू धर्म के नाम पर बेवकूफ़ बने हुए हैं और ब्राह्मणों की गुलामी कर रहे हैं। 


 ⚠️ सावधान ⚠️


💓रविदासिया पंथ, कबीर पंथ, सातनामी पंथ, वाल्मीकि पंथ आदि अलग अलग पंथों और धर्मों के नाम पर लोग धंधा कर रहे हैं और इन महान संतों के विचारों खत्म रहे हैं ए लोग ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देने वाले गुमराह लोग है और RSS के आदमी हैं💓


👉 तथागत गौतम 563 ईसा पूर्व ही पैदा हुए थे ओर बुद्ध के विचारों को संत शिरोमणि रविदास,महान संत कबीरदास, गुरुनानक देव, घासीदास, स्वामी अछूतानंद, पेरियार रामास्वामी नायकर और ज्योतिबाराव फुले ने किया था क्योंकि उन्हे उस समय इतिहास की जानकारी नहीं थी इसलिए बुद्ध धम्म की बात न करके अपने अपने अनुयायियों को अपने पंथ के माध्यम से जागरूक करने की कोशिश किया था।
👉 आधुनिक भारत के निर्माता सिंबल आफ नालेज बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने जिन्होंने डबल डाक्टरेट की डिग्री हासिल की और भारत के पूरे इतिहास का गहन अध्ययन किया और 22 बर्षों तक सभी धर्मों का गहन अध्ययन करने बाद पाया कि बुद्ध धम्म ही भारत का सबसे प्रचीन और बैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित मानवतावादी धर्म है इसलिए बुद्ध धम्म ग्रहण किया था और देश वासियों को बुद्ध धम्म दीक्षा दिया और पूरे भारत को बुद्धमय करने की घोषणा किया था।
👉 आज शूद्र समाज के लोग जो बाबासाहब डॉ अंबेडकर के कारणों से ही पढ़ लिख कर ऊंचे ऊंचे पर्दों पर बने हुए हैं वे लोग बाबासाहब डॉ अंबेडकर की न मान कर अपने आप को लीडर बनने के चक्कर में अलग अलग धर्मों का प्रचार प्रसार करके समाज को ठगने और ब्राह्मणों का गुलाम बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं ।


👉 सभी साथियों से निवेदन है कि अलग अलग धर्मों और पंथो के चक्कर में गुमराह ना हो क्योंकि पहले ही अलग अलग जातियों में बंट कर अपमानित हो रहे और अब धर्मों में बंट कर अपमानित होंगे आपके साथ कोई भी नहीं खड़ा होगा
बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने बहुत ही दूरदर्शिता से हमें बौद्ध धम्म दिया है जब हम बौद्ध बनते हैं तो विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धर्म बौद्ध धम्म है और विश्व के 125 देशों में है इस प्रकार हमारा रिसता विश्व के 125 देशों से जुड़ा जाता है।
इसलिए हमें रविदास जी, कबीरदास जी और सभी संतों का सम्मान करते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण करके खुद और अपनी आने वाली पीढ़ी को भी नीचता और अपमान भरा जीवन से मुक्त करके जातिवाद अंधविश्वास और पाखंड को खत्म करके सम्मानित जीवन दे कर जाएंगे ।


अगर समझ में आया है तो शेयर जरूर करें ।
बौद्धाचार्य डॉ एस एन बौद्ध 9953177126 ✍️
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❤️इंसान बनने की 💊 दवाई,❤️
🌹बिलकुल फ्री 🌹


👑संविधान शरणं गच्छामी 👑
💙आंबेडकर शरणं गच्छामी💙
💓बुद्धं शरणं गच्छामी 💓


🌺शिक्षित बनो🌺
🌼संगठित रहो🌼
 🌷संघर्ष करो🌷


🌹जागरूक बनो🌹
💐बौद्ध बनो💐
👑शासक बनो 👑 


धर्म और जातियों में बंटे लोग जानवर 🦓 हैं
जब तक धर्म और ऊंच नीच भेदभाव की जातियों में बंटे रहेंगे तब एकता नहीं हो सकती है और जानवरों से भी बदतर लोग आपस में मरते और मारते रहेंगे ।
जो लोग ब्राह्मणों के आंडबर पाखंड और ऊंच नीच भेदभाव की जातियों को छोड़ चुके हैं सभी बौद्ध है खुद को बौद्ध बोलें और धर्म के स्थान पर बुद्ध धम्म लिखना शुरू करें धम्म दीक्षा सर्टिफिकेट चाहते हैं तो निम्नलिखित बुद्ध वंदना और त्रिशरण और पंचशील को ध्यान पूर्वक पढें और बाबा साहब डॉ अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं का पालन करते हुए अपना अपना जीवन जीयें। 


दीक्षा बुद्ध वंदना (पालि में)
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासमबुद्धस्स.
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासमबुद्धस्स.
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासमबुद्धस्स.


त्रिशरण
बुद्धं शरणं गच्छामि.
धम्मं शरणं गच्छामि.
संघं शरणं गच्छामि.


दुतियम्पि बुद्धं शरणं गच्छामि.
दुतियम्पि धम्मं शरणं गच्छामि.
दुतियम्पि संघ शरणं गच्छामि.


ततियम्पि बुद्धं शरणं गच्छामि.
ततियम्पि धम्मं शरणं गच्छामि.
ततियम्पि संघ शरणं गच्छामि.


पंचशील
पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.
अदिन्नादाना वेरमणि सिक्खापदं समादियामि.
कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.
मुसावादा वेरमणि सिक्खापदं समादियामि.
सुरामेरयमज्जपमादट्ठाना वेरमणि सिक्खापदं समादियामि.


भवतु सब्ब मङ्गलं!


साधु! साधु! साधु!


बुद्ध वंदना (हिंदी में)
मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमस्कार करता हूँ.
मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमस्कार करता हूँ.
मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमस्कार करता हूँ.


त्रिशरण
मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ.
मैं धम्म की शरण जाता हूँ.
मैं संघ की शरण जाता हूँ.


दूसरी बार मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ.
दूसरी बार मैं धम्म की शरण जाता हूँ.
दूसरी बार मैं संघ की शरण जाता हूँ.


तीसरी बार मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ.
तीसरी बार मैं धम्म की शरण जाता हूँ.
तीसरी बार मैं संघ की शरण जाता हूँ.


पंचशील
मैं अकारण प्राणि-हिंसा न करने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ.
मैं बिना पूर्व स्वीकृति के किसी की कोई वस्तु न लेने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ. अर्थात मैं चोरी नहीं करुँगा.
मैं व्यभिचार न करने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ.
मैं झूठ बोलने, बकवास करने, चुगली करने से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ.
मैं कच्ची या पक्की शराब, मादक द्रव्यों के सेवन, प्रमाद के स्थान से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ.


सबका मंगल हो!


साधु! साधु! साधु!
बौद्धाचार्य डॉ एस एन बौद्ध 9953177126 ✍️ 
 बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने बुद्ध धम्म दीक्षा ग्रहण करने के लिए हमें 22प्रतिज्ञाएं दी हैं,


जो निम्नलिखित हैं👇
1-मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा/करूंगी और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा/करूंगी। 
2-मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा/रखूंगी और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा/करूंगी। 
3-मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा /रखूंगी, और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा/करूंगी। 
4-मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ/करती हूं। 
5-मैं यह नहीं मानता/मानती और न कभी मानूंगा/मानूंगी कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता/मानती हूँ। 
6-मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा/लूंगी, और न ही पिंड-दान दूँगा/दूंगी। 
7-मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा/करूंगी। 
8-मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा/करूंगी। 
9--मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता/करती हूँ। 
10-मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा/करूंगी। 
11-मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा/करूंगी। 
12-मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा/करूंगी। 
13--मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा /रखूंगी तथा उनकी रक्षा करूँगा/करूंगी। 
14-मैं चोरी नहीं करूँगा/करूंगी। 
15-मैं झूठ नहीं बोलूँगा/बोलूंगी। 
16--मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा/करूंगी। 
17-मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा/करूंगी। 
18-मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा/करूंगी एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा/करूंगी। 
19-मैं हिंदू धर्म का त्याग करता /करती हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता /अपनाती हूँ। 
20-मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता/करती हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है। 
21-मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा /रही हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
22-मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता /करती हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा/करूंगी। 


.💐डा बी.आर. अम्बेडकर💐


देश से जातिवाद की बीमारी को खत्म करने के और अम्बेडकर वादी सरकार बनाने के लिए हमें दो और प्रतीज्ञाएं लेने की जरूरत है
1-मै, कभी भी किसी भी हिन्दू मंदिर नहीं जाऊँगा /जाऊँगी, और ना ही कभी ब्राह्मणों और बाबाओं को दान दूँगा /दूँगी.
2-मै भी कभी भी किसी भी पार्टी के मनुवादी (हिन्दू धर्म मानने वाले) उम्मीदवार को वोट नहीं दूँगा /दूँगी.


PRESIDENT OF✍️✍️✍️


🌍NATIONAL AND INTERNATIONAL BUDDHIST SOCIETY 🌍
🌺बौद्धाचार्य डॉ एस एन बौद्ध 9953177126 
 Bauddhacharya SN BAUDDH: http://www.tbsi.org.in/
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