सर्वहारा_बहुजन_वर्ग_अपनी_सोच_मे_परिवर्तन_लाए

#सर्वहारा_बहुजन_वर्ग_अपनी_सोच_मे_परिवर्तन_लाए
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....हमारी गरीबी दैवीय कारणो से नही, बल्कि सामाजिक कारणो से है!..अपने अंतहीन दुखो को किसी ईश्वर का शाप अथवा पूनर्जन्मो का पाप नही समझे!..हमारी दीनता और हीनता के मूल मे वर्णव्यवस्था मे आधारित समाज व्यवस्था है! #भारतीय_समाज_विषमता_पर_आधारित_है!


....अतः हमे वर्तमान व्यवस्था से उपर उठने और वर्तमान समाज व्यवस्था मे परिवर्तन के लिए संघर्ष करने का जोश पैदा करना होगा!..बहुजनो के उद्धारक बाबासाहेब आम्बेडकर ने अपना सारा ध्यान बहुजनो की उन्नति और उद्धार मे लगाया था!..वे कभी भी तथाकथित राष्ट्रवादी ब्राम्हणो के बहकावे मे नही आये!


....स्वतंत्रता आन्दोलन मे उन्होने बहुत सोच-समझकर अप्रत्यक्छ भाग नही लिया क्योकि सत्ता अंग्रेजो से ब्राम्हणो के हाथ मे आने के बाद भी बहुजनो के सामाजिक स्तर मे कोई बदलाव आनेवाला
नही था!..बल्कि ब्राम्हणो के अधीन रहना और भी दुखदायी था जो आज भी देखा जा रहा है!..कि कैसे मनुवादी सरकारे बहुजनो को दास बनाये रखने के लिए दाव पैतरा चलते रहते है!
 
....भारत मे स्वतंत्रता आन्दोलन मे भाग लेने वाले लोग वही थे जिन्हे विदेशी शासन ने राजनीतिक अधिकारो से वंचित कर रखा था और वे इन्ही अधिकारो को पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे!.. अगर वे लोग राजनीतिक अधिकारो को पाने मे सफल हो पाते है तो निश्चय ही भारत मे उनकी प्रभुता स्थापित हो जायेगी और वही हुआ!


....उन्होने भारतीय इतिहास से सीखा था कि यहा बडे-बडे दयालु राजा-महाराजा हुए, उनके राज्य मे बडी खुशहाली रही.. #परंतु_अछूतो_को_अछूत_ही_माना_गया_बहुजनो_को_दास_ही_माना_गया!


....अतः बहुजनो को आज भी अपनी मुक्ति का आन्दोलन स्वयं ही तेज करना चाहिए!..उन्हे भारतीय राष्ट्रवादियो के बहकावे मे नही फसना चाहिए!..आर्थिक उपलब्धि ही हमारी मुक्ति और उन्नति का द्वार खोल सकती है!


....हमारे पास बेशुमार श्रमशक्ति है परंतु मार्केटिन्ग स्किल नही है,हमे इस ओर ध्यान देना होगा!..बाबा साहब कहते थे-- हमे मजदूर नही, मालिक बनने का सपना देखना होगा!


#दलितो_के_लिए_सामाजिक_न्याय_तबतक_थोथी_दलील_है_
#जबतक_उन्हे_आय_के_सभी_स्त्रोतो_मे_भागीदार_नही_बनाया_जायेगा!
#भागो_नही_दुनिया_को_बदलो!
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🙏#जयभीम_जयभारत_जयसंविधान🙏


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