आज के माहौल मे  आन्दोलन, धरना, प्रदर्शन की सार्थकता

*🔥आज के माहौल मे  आन्दोलन, धरना, प्रदर्शन की सार्थकता🔥* 
    हमारे एक दोस्त का फोन काल आया। उनका कहना था कि दिल्ली मे आरक्षण लेने के लिए पिछड़े समाज का बहुत बड़ा आन्दोलन करना है। आप को भी - - - । आगे और वो कुछ बात करते, लेकिन मैने बीच मे ही टोक दिया और कहा कि, यह सरकार आप को क्यो आरक्षण देगी? काफी तर्क पूर्वक बाते हुई और निष्कर्ष निकला कि - - 
    किसी को कुछ भी नही मिलेगा, यह जानते हुए भी नेता लोग अपनी अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए अलग अलग टुकडो मे धरना प्रदर्शन, सत्याग्रह आन्दोलन करते रहते है और करते रहेगे। हां, यदि इमानदारी से कुछ हासिल करना चाहते हो तो सभी मिलकर दस लाख लोगो का आन्दोलन कर पूरे दिल्ली को ठप्प कर दो, हो सकता है आप को कुछ मिल जाय।
   विचित्र विडंबना है, नेता लोग ही मोर्चे मे  कहते है कि इस समय संविधान लागू नही है और देश मनुस्मृति के अनुसार चल रहा है। तो क्या आप को मनुस्मृति मे ऐसे आन्दोलन की इजाजत है ?,फिर क्यो करते हो? क्या न्याय मिलेगा? क्या किसी को कुछ मिलने की उम्मीद की जा सकती है। मै दृढप्रतिज्ञ दावे के साथ कह सकता हू कि, किसी को भी अगले पांच साल तक कुछ भी नही मिलने वाला है? हां कुछ हद तक आप की नेतागिरी जिन्दा रह सकती है।
   जब संविधान ही लागू नही है तो आप संवैधानिक तरीके से अपने अधिकार कैसे प्राप्त कर सकते है? आप को भी असंवैधानिक होना पडे़गा। जो आप के बस मे है और जो आप कर सकते है, सिर्फ उसी पर अपना आन्दोलन तेज कीजिए, वहा आप को सफलता जरूर मिलेगी।
 पहला सुझाव - - 
  शूद्र समाज का ब्यक्ति, जो रात दिन भाजपा को कोसता रहता है और ज्योंही उसका कोई करीबी या जाति का भाजपा का नेता, बिधायक, सांसद, मंत्री, उसके गांव या कस्बे मे आता है तो, वही बिरोध भुलाकर तुरंत फूल माला लेकर स्वागत के लिए दौड पडता  है। 
  यदि कुछ हासिल करना चाहते हो तो, बिना पक्षपात के, निडर होकर, संविधान बचाने के लिए  इस प्रवृत्ति को बदलना पडे़गा।
  बस, अब एक ही लक्ष्य, जो आपके बस मे है, जीत भी सुनिश्चित है, धरना प्रदर्शन भी बड़े पैमाने पर करने की जरूरत नही है, पैसे का खर्च भी नही है, सिर्फ दृढप्रतिज्ञ होना है,कुछ अच्छा कर गुजरना है।
    शूद्र समाज से संबंधित किसी भी भाजपाई नेता का, जब वह अपने चुनावी एरिया मे आता है तो उसका स्वागत संवैधानिक तरीके से नही, रामराज्य के तरीके से होना चाहिए। इससे दो फायदा होगा, चमचा भी आप के साथ आने को मजबूर होगा और पूना पैक्ट के जरिए दलाल पैदा नही होगे।
   *डोल गवार चमचा पशु नारी,* 
    *सकल ताड़ना के अधिकारी।* 
   दूसरा सुझाव -अगली बार 
 *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव*