आज़ादी के समय वंचितों ने बहुत बढ़ चढ़ कर भाग लिया था, ये जानकर की आजाद होंगे तो दुखों से मुक्ति मिलेगी, जातिवाद और छुआछात का भेदभाव नहीं होगा

आज़ादी के समय वंचितों ने बहुत बढ़ चढ़ कर भाग
लिया था, ये जानकर की आजाद होंगे तो दुखों से मुक्ति
मिलेगी, जातिवाद और छुआछात का भेदभाव नहीं होगा
वंचितों से वादा किया गया था की आजादी मिलने के बाद सबको न्याय मिलेगा सबकी भागीदारी शासन प्रशासन में सुनिश्चित की जाएगी,,सब संसाधनों में सबका
बराबर का हिस्सा होगा। वंचितों ने भी अंग्रेजों के खिलाफ
अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया।


जलियांवाला बाग से लेकर उधम सिंह तक बलिदान हुए।
लाखों ऐसे थे,जिनका बलिदान भी नहीं गिना गया। लाखों
का नाम इतिहास में भुला दिया गया।


आज 70 साल बाद भी स्थति में औरों
की तुलना में आंशिक अधिकार ही मिले हैं
देश की सत्ता और शिर्ष स्थानों पर आज भी
सवर्णों का कब्जा है। गरीब लोगों की स्थति
अति दयनीय है।आज भी लोग रोटी को तरस
रहें हैं। ऐसा क्यूं हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार
है, इन सवालों के जवाब ढूंढ़ना कोई मुश्किल काम
नहीं है।