*चीर हरण या चरित्र हनन*

*चीर हरण या चरित्र हनन*
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चीर हरण ही चरित्र हनन है,जैसे- किसी के आंतरिक मानसिक भावनाओं पर चोट करना या उसके दिल दिमांक पर अस्प्रृताओं की भावनाओं द्वारा प्रताडित करना गलत सोच व्योहार करना जब कि यह जानते हुएे कि मानव सभी समान हैं।
      *चित्त वृति निरोधा:*
चित्त की वृतियों को रोकना,परखना,और परख कर चित्त शुद्धी से चरित्र का निर्माण होता है,बुद्धी शुद्धी से से विवेक का बोध होता है जिसे *बोध सत्व* या स्वंय स्व- रूप बोध कहते हैं।
      *"अप्प दीपो भव:*"
आप अपने भाग्य के स्वंय निर्माता हैं।
       अंधविश्वास, पाखंडवाद या अस्प्रृश्ता का त्याग नहीं होगा तब तक मानव का चीर हरण चरित्र हनन होता रहेगा।
     अमर सिंह
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