प्रवीण सरल : संवाददाता की कलम से लॉक डाउन क्यों जरूरी है

निश्चित रूप से लाकडाउन यहां की लोगों की जान बचा सकता है।और जान बची भी परंतु इसका खामियाजा उन गरीब मजदूरों और लाचारों ने भुगता है उनके लिए क्या कोरोना उनका तो इधर भी मरना उधर भी मरना ।
बाहर पुलिस की बर्बरता घर के अंदर भुखमरी लाचारी के  उनका मरना तय और कुछ नहीं दिख रहा जिस बीमारी का इलाज हम घरों में कैद होकर कर रहे हैं इस बीमारी का इलाज कौन करेगा और कैसे होगा संपन्न लोग हैं उनकी तो व्यवस्थाएं ठीक ठाक चल रही हैं और अनंत काल से चली आ रही है और चलती रहेगी लेकिन गरीब मजदूर हमेशा पिसते आए हैं और किसी ने उनकी तरफ  नहीं देखा । न देखना चाहता हम बड़ी-बड़ी इमारतें हैं बड़े बड़े पुल देख कर हम अपना सीना गर्व से चौड़ा कर लेते हैं परंतु उसको बनाने वाले गरीब मजदूरों का खून पसीना बहा है आज इस देश में भुखमरी से मर रहा है ।
       हमें आज छोटे में पढ़िए कहानी याद आती है आप सभी ने पढ़ी होगी "मैं मजदूर हूं"  खुशी पढ़िए गा जरूर ताकि मानवीय संवेदना है आप समझ सके क्योंकि समझे बिना हम कुछ नहीं कर पाएंगे । 
     बड़े-बड़े वादे किए गए सरकारें आई और चली गई हम जस  के तस ही रहे ।