विचार मे क्यो आया

*🔥मिशन-गर्व से कहो, हम शूद्र है।🔥* 
   *🔥विचार मे क्यो आया?🔥* 
                               दिनांक 04-09-2015
भाइयो बड़े दुख व हर्ष, दोनो के साथ अपना कुछ अनुभव बाटना चाहता हूं। 
  मैं सुनते आ रहा था और अनुभव भी किया हूं कि शूद्र समाज के लोग जब बड़े ओहदे या पद पर पहुच जाते है तो, अपने समाज से दूरी बनाए रखते हुए , अपनी पहचान भी छिपाने की कोशिस करते है , जो आज भी जारी है। ५०-६० साल पहले जीविका चलाने के लिए कुछ परिस्थितियों में सही भी था। बाबा साहब अम्बेडकर ने भी अपने समाज को उद्वेलित करते हुए कहा था कि जिस समाज मे, जिस गांव में, जिस जिले मे, तुम्हे मान-सम्मान नही मिलता है, वहां से बाहर निकलो और शहरों की तरह कूच करो। पढ़ो-पढ़ाओ और इसके लिए मान-सम्मान से, मजदूरी, नौकरी, ब्यवसाय हासिल करो। मंत्र दिया:- *शिक्छित करो, संघटित रहो, संघर्ष करो।* 
 इस मंन्त्र का परिणाम है कि, आज महाराष्ट्रा में 85% शूद्र समाज से सिर्फ 4% महार, बाबा साहब की बात मानकर , हिन्दू धर्म छोड़कर, बौद्ध धर्म अपना लिया और दूसरे लोग मनुवाद के खड़यन्त्र का शिकार हो गए। आज गर्व से कह रहा हूं कि, महाराष्ट्रा मे सिर्फ 4%महार (बौद्ध), नौकरी मे, प्रशासनिक व्यवस्था मे, शिक्छा मे, विदेश मे, सामाजिक, आर्थिक, सान्षिकृतिक और राजीनितिक सोच में ब्राह्मण के बाद दूसरे स्थान पर वर्चश्व बनाए हुए है। आज शूद्र समाज अपने आप को ठगा और छला हुआ महशूस कर रहा है। स्थिति आज भी जैसी की तैसी है।
  दिनांक -28-01-2015 को  मैने अपने एक एस् सी, सहकर्मी मित्र   जो 1989 से BAMCEF (Kansi Ram। ) मे सहयोगी भी रहे है, D. G. M. ( MTNL) पोष्ट पर कार्यरत है । अपने ही कम्प्लेक्श मे फ्लैट बिकत दिलवा दिया था, गृह-प्रवेश मे गया, चकित रह गया। द्वार का डेकोरेशन (गणपति मंदिर के साथ) ऐसा लगे, जैसे किसी ब्राह्मण का घर है और अन्दर काफी खर्च करके खान-पान के साथ "ब्राह्मणो द्वारा  सत्यनारायण" की पूजा कथा। मेरी गुप्त प्रतिकृया को समझकर, अकेले मे कहा,  मजबूरी मे पिता जी के ----.। प्रसाद तो नही लिया, लेकिन खाना इसलिए खाया कि कहीं परिवार हमें ही अन्यथा गलत न समझ बैठे।
 मै उस रात सो नही पाया, ऐसा क्यो? BAMCEF मिशनरी,  क्या मजबूरी है? उसके पास पैसा, दौलत, पद, होहदा , माान-सन्मान सभी है लेकिन डर किस बात की, अपने आाप से तर्क पर तर्क और मंथन करते -करते बिना नींद  के रात बीत गई।
 *विष्कर्ष* - मेरे दोष्त का कोई दोष नही है, व्यवस्था का दोष है। शूद्र नाम को ही, बिना किसी कारण, सैकड़ो सालों से, वर्ण व्यवस्था ने इतना दूषित कर दिया है कि, इसे समझने और जानने  की अब मेरे लिए पहली प्राथमिकता बन गई। मै जहां भी जाता, ब्राह्मण से भी तथा छत्रिय, वैश्य, पिछड़ी जातियां, दलितो, यहां तक कि मुसलमानो, इसाइयो और बुद्धिष्टो  से भी सवाल -जबाब, तर्क-वितर्क करता रहा। तथ्य यह भी सामने आया कि धर्म परिवर्तन करने के बाद भी इस बिमारी से पूरी तरह छुटकारा नही मिल पा रहा है ।
 *निष्कर्ष* - सिर्फ दो-तीन बेवकूफी भरे कारण सामने आया। 
     *पहला* - हिन्दू धर्म के वेदो, पुराणो और स्मृतियो मे शूद्र को नींच, दुष्ट, पापी आदि गालियो से सम्बोधित कर तथा उसे भाग्य और भगवान् से मान्यता बताकर, शूद्रो के दिलो -दिमाग मे ऐसी आस्था भर दी गई कि वह बेचारा खुद भी इस घृणित बुराई को बिरोध के बजाय, स्वीकार कर लिया ।
     *दूसरा* - मरे हुए पशुओ के मांस खाते थे! 
 *तर्क-वितर्क-* अरे भाइ ! उस समय तो ब्राह्मण गाय,घोड़ो को जिन्दा काटकर  खाते थे।
 दोनो मे बड़ा अपराधी और नींच-दुष्ट कौन है? अहिन्सावादी मरे हुए पशुओं के मांस खाने वाला या हिन्सावादी ब्राह्मण जिन्दा गायो को काटकर खाने वाला।
    *तीसरा* -  छोटे -छोटे काम और गंदगी साफ करते थे।
 *निष्कर्ष* - क्या काम करना नीचता और अपराध है, या ढोंग और पाखंड करना? गन्दगी करने वाला नींच-दुष्ट या महान है कि उसे साफ करने वाला!
  *तर्क-वितर्क मे यह भी सामने आया कि, शूद्र समाज सभी तरह के कर्म करके देश और समाज को हजारो साल से सबकुछ दिया है और ब्राह्मण बिना कर्म किए बेवकूफ बनाकर, देश व शूद्र समाज से सिर्फ लिया है।* 
 तो महान कौन है, लेने वाला या देने वाला!
सही जबाब और असलियत मालूम होने पर सभी के सर शर्म से झुक जाते थे। यहां तक कि ब्राह्मणो के भी ।
  मुझे उत्साह और मनोबल मिला। अच्छे कामो से ही किसी के अच्छे नाम होते है लेकिन यहां तो शूद्र को गर्व करने की बात दूर रही,  सैकड़ो साल से अपमानित ही किया जा रहा है। आखिर बेवजह कबतक चलता रहेगा। यदि आज हम नही रोकते है तो कल हमारे बच्चो को भी कलंकित होना ही पडे़गा। इसलिए शूद्र नाम पर लगे कलंक को धोने का संकल्प लिया। परिणाम के रूप मे एक " *मिशन* " 
  " *गर्व से कहो हम शूद्र है "* 
    का एक मंत्र मिला और दिनांक 04-09-2015 को 
       " *शूद्र एकता मंच"*
एक सामाजिक संस्था का निर्माण किया गया। आप सभी शूद्र साथियो से सहयोग की उम्मीद मे! धन्यवाद!
   आप का समान दर्द का, हमदर्द साथी!
 *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
 मो0- W- 7756816035