20 लाख करोड़ का पैकेज INDIA के लिए है. BHARAT के लिए सिर्फ नए श्रम कानून में 18 घन्टे श्रम करना

20 लाख करोड़ का पैकेज INDIA के लिए है. BHARAT के लिए सिर्फ नए श्रम कानून में 18 घन्टे श्रम करना है !


मैं कोई अर्थशास्त्री नही हूँ. इतना जानता हूँ सरकार ने इस पैकेज में एक रुपया श्रमिकों और गरीबों को नही दिया. फ्रांस इंग्लैंड स्पेन इटली अमेरिका और कनाडा जैसे देश अपने नागरिकों को सीधे पैसे देकर आर्थिक सहायता कर रहे हैं !


INDIA में उद्योगपति रहते हैं, 1% अमीर रहते हैं जिनके पास BHARAT की 73% संपत्ति पर कब्ज़ा है. BHARAT गरीब है, ओबीसी एससी एसटी वर्ग के किसान मजदूरों का बसेरा !


सरकार INDIA के अमीरों से कह रही हैं बिना गारंटी के बैंक से बिंदास क़र्ज़ उठाओ, बैंक गारंटी हम लेंगे. क़र्ज़ लेंगे और भरेंगे नही. सरकार INDIA के अमीरों का क़र्ज़ माफ़ कर देगी !


क्या इस तरह मोदी सरकार आर्थिक मंदी से देश को उभारेगी ? एक तरफ सरकार कह रही है मजदूरों को पूरा वेतन दो, दूसरी तरफ सरकार सरकारी कर्मचारियों का वेतन काट रही है !


इस समय SUPPLY रुका है, DEMAND है लेकिन PURCHASING CAPACITY कम है. 80 करोड़ आबादी की खरीदारी करने की क्षमता एक दम निचले स्तर आ चुकी है. ऐसे लोग पूरी तरह सरकार के समर्थन पर जिएंगे. 


PDS में एक व्यक्ति पर 5 किलो अनाज मिलता है, क्या कोई एक महीने तक 5 किलो अनाज पर जिंदा रह सकता है. गोदाम भरा हुआ है लेकिन मोदी का इरादा नही है !


सरकार को 10 करोड़ श्रमिकों को डायरेक्ट 7000 कैश ट्रांसफर करना चाहिए. सरकार को एक महीने का ख़र्च 70,000 करोड़ पड़ेगा और जुलाई महीने तक मदत करने का खर्च 2,10,000 करोड़ !


20 लाख करोड़ में यह रकम 10% है, इस 10% रकम से 50 करोड़ आबादी को आर्थिक संकट से बाहर निकलने में मदत मिलेगी. उनकी PURCHASING CAPACITY बढ़ेगी वे अपनी जरुरत का सामान खरीदेंगे !


मार्किट में खरीदारी बढ़ने से अर्थव्यवस्था का पहिया चल पड़ेगा !


मजदूर ओबीसी एससी एसटी वर्ग से हैं, इसी कारण सरकार उन्हें मदत ना देकर INDIA के सवर्ण उद्योगपतियों को मदत दे रही है. इस सिस्टम में राहत ऊपर से निचे आने में काफी वक़्त लगता है और तब तक करोड़ों लोग कुपोषण का शिकार हो जाते हैं !


आप ही सोचिये देश के 80% आबादी 50 दिनों से अपने बचत पर ज़िंदा है, लॉक डाउन हटने के बाद उनके पास पैसा कहां बचा रहेगा ?


बिना पैसे के कौन खरीदारी करेगा मार्किट में ?


✍Kranti Kumar
✍Kranti Kumar