अब्राहम लिंकन & शूद्र गौरव*

🔥21वां एपिसोड,सुबह,दिनांक 27-04-2020🔥
*🔥अब्राहम लिंकन & शूद्र गौरव*🔥
    *एक बार अमेरिकी संसद में अब्राहम लिंकन बोल रहे थे। तब एक सामंती मानसिकता वाले सांसद ने लिंकन को टोकते हुए कहा कि, घमंड मे ज्यादा जोर से मत बोलो लिंकन, ये मत भूलना की तुम्हारे पिता हमारे घर के जूते सिलते थे, अपनी हैसियत मत भूलो।* 
      इस पर लिंकन ने शालीनता से तुरंत उत्तर दिया, "महोदय, मुझे पता है कि मेरे पिताजी आपके परिवार के लिए जूते बनाते थे और यहां कई अन्य लोगो के भी बनाये होंगे। वे जूतों के एक अच्छे निर्माता थे। अगर उनके काम में  आपको कोई शिकायत है तो मैं जूते की एक और जोड़ी आपके लिऐ बना सकता हूंँ। वे एक प्रतिभाशाली निर्माता थे और मुझे अपने पिता जी पर गर्व है। 
   *यह सुनते ही उसकी मूड़ी शर्म से झुक गई। अब बोलो चुप क्यों हो गए? मुझे नींचा दिखाना चाहते थे, मगर अब आप खुद, अपनी नींच सोच के कारण नींच साबित हुए। उस अमेरिकी संसद के ऐतिहासिक वार्तालाप से एक थ्योरी निकली "Dignity of Labour" श्रम की महानता  और इसका यह असर हुआ कि जितने भी कामगार थे उन्होंने अपने पेशे को ही अपना गौत्र (surname) बना लिया।* 
   आज अमेरिका में श्रम को सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है, इसलिए आज अमेरिका को दुनिया की महाशक्ति माना जाता है।
   *हमारे यहा सिर्फ कहावत भर है, कर्म ही पूजा है  (Work is warship ) मनुवाद के कारण  जमीनी सच्चाई कोसो दूर है।* 
   *इसके विपरीत भारत मे कर्म करके जीवनपयोगी बस्तुओ का उत्पादन करने वालो को नीच और परजीवी, ढोगी, पाखंडी को उच्च  समझा जाता है। आज भारत देश की बदहाली का  मुख्य कारण भी यही है।* 
   साथियो, यदि बदलाव चाहिए तो, हमे और आप सभी को इस अमेरिकन थ्योरी को ध्यान मे रखते हुए अपनी मानसिकता मे थोडा बदलाव लाना होगा। और ढोंगी, पाखंडी सामने दिखाई देते ही, अपने आप  मे फक्र महसूस करना चाहिए। धन्यवाद! 
    *गर्व से कहो हम शूद्र है* 
  *आप का समान दर्द का हमदर्द साथी,* 
    *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
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