भगवान नहीं, संविधान भरोसे आप का मान-सम्मान बचेगा!

🔥35वां एपिसोड,सुबह,दिनांक 04-05-2020🔥
*🔥 भगवान नहीं, संविधान भरोसे आप का मान-सम्मान बचेगा!🔥* 
    कुछ दिन पहले एक खबर समाचार पत्र में छपी थी। यह उनके लिए हैं,जो बड़ी शान से कहते हैं कि अब छुआछूत नहीं है। अहमदाबाद के एक सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापक द्वारा एक ही SC टीचर के लिए पानी पीने के लिए अलग से मटका रखा गया है।
    कुछ दिन पहले एक और सत्य ख़बर आईं थी कि, योगी सरकार मे टुन्डला, नागला  के एक प्रधानाध्यापक सुनीता को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बकायदा यह पत्र मे दर्शाते हुए कि, आप जय भीम! सम्बोधन करती है, इसलिए आप को सेवा से निलंबित किया जाता है।
    कुछ दिन पहले प्रमाणिक और सत्य खबर सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए खूब वायरल हुई थी।
   वीडियो विवरण- योगी सरकार के कायर, डरपोक बुजदिल गुंडे हेलमेट लगाए, गांव-रामपुर शाहगंज जिला-जौनपुर, में जाकर शूद्रों को डरा धमका रहे हैं। खासकर नौजवान बच्चों से यह पूछते हुए कि, पूजा करते हो?, जबाब में नहीं।, हनुमान चालीसा याद है?, नहीं। क्यों नहीं याद है?, नहीं मानता हूं। क्यों नहीं मानते हो? सुनो, ओमप्रकाश जी! यह हनुमान को नहीं मानता है। गणेश को मानते हो? नहीं। राम को मानते हो? राम को भी नहीं मानता हूं। सीता को मानते हो? नहीं। विश्णू को मानते हो? नहीं। अपमानित करते हुए दूसरे गुंडे को कहता है, इसे ले चलो थाने। दूसरा गुन्डा लेकर जाता है। जोर से आवाज करते हुए, इसको भी उठाओ, इसको भी ले चलो। इसी तरह मोटरसाइकिल पर गांव आते हुए दो नौजवानों को भी अपमानित करते हैं। तबतक भीड़ में से तनतनाती एक लाल साड़ी पहनी हुई अकेले औरत कुछ दूर पर खड़े बंधक नौजवान को, गुंडों को धमकाते हुए छुड़ा लाती है। अपनी सूझबूझ और हिम्मत से अकेले आतंकी माहौल को बदलने में सफल हो जाती है और गुंडों को भागने के लिए मजबूर कर देती है। इस बहादुर महिला और बेधड़क जबाव देने वाले बच्चों को मान सम्मान के साथ सैल्यूट तो बनता ही है। 
  शूद्रों इसे देखकर भी आप की आंखें खुल जानी चाहिए, क्या यही भगवान में आस्था है? कि व्यापार है? या गुलाम बनाने की राजनीति? सैकड़ों साल पहले हमारे पूर्वजों के साथ इससे भी बद्दतर हालात रहे होंगें।
    यहां विशेष रूप से  हिन्दू धर्म को मानने वाले अपने यादव भाइयों से सवाल पूछना चाहता हूं कि, यह कहीं भी तुम्हारे भगवान श्री कृष्ण का नाम नहीं लिया है। इससे साफ झलकता है कि हिन्दू धर्म के मानने वाले सवर्ण श्री कृष्ण को सीता और हनुमान के बराबर की बात दूर रही, एक अच्छा इंसान भी नहीं मानते हैं। मैं अनुभव से कह रहा हूं, 25-30 साल पहले श्रीकृष्ण मंदिर इस्कान में जो भीड़ आस्था दर्शन करती थी, वह आज नदारत है। पिकनिक के लिए जरुर कुछ लोग जाते हैं।
  यादव बन्धुओं आप के अलावा (कुछ अपवाद छोड़कर) कोई भी श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानता है। अंधभक्त यादव भी अब जय श्रीराम बोलते हैं। अभी समय है,सचेत हो जाओ! नहीं तो ए भगवाधारी, चोर -छिनार का प्रचार करते हुए, आर्यो को मुंह तोड़ ज़बाब देने वाले महानायक श्रीकृष्ण को इतिहास से मिटा देंगे। भगवान नहीं, महानायक के रुप में बचा लो। खणयंत्र को समझो, इससे बाहर निकलो। आप के ऐसा करते ही, 85% जन-मानस शूद्र, आर्यो के दुश्मन, श्रीकृष्ण को महानायक का सम्मान देते हुए सर आंखों पर उठा लेगा।
  बुझदिल (हम से क्या मतलब) शूद्रो! इस गुमान, घमंड और अपनी अपनी जातीय की उच्चता के अहंकार से बाहर निकलो। आज सीता, हनुमान की बात है, कल गोलवलकर और गोडसे को पूजने को बाध्य करेंगे। यदि ऐसे ही सोए रहे तो,  आज जय भीम है,  कल जय श्री कृष्ण सम्बोधन पर तुम्हारी कुटाई होगी । अहंकार मे इसे  मजाक मत समझो! शूद्रो की सभी जातियो को आगाह कर रहा हू!  याद करो! 70 साल की स्वतन्त्रता के बाद, इतने दिनो मे,  कभी सपने मे भी आप को यह खयालात आया होगा कि, एक मुख्यमंत्री के बंगले को खाली करने पर , गंगा जल से शुद्ध किया जाएगा? 
    इस मनुवादी व्यवस्था में मौर्यवंशी उप मुख्यमंत्री को भरी सभा में, स्टेज पर एक ब्राह्मण हाथ मिलाने से इन्कार करता है, बेइज्जत होते हुए स्टूल पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है। कहीं कहीं, कभी कभी,आए दिन अपमानित होते हुए, मंत्री तक को जमीन पर बैठने और पत्तल में भोजन करने को मजबूर होना पड़ता है। यहां तक कि राष्ट्रपति जी को भी पूरा देश अपमानित होते देख चुका है। क्या इन आचरणों से कहीं भी समता, समानता और बन्धुत्व का संविधान झलकता है, नहीं, यही मनु-स्मृति है। क्या आप पर खुद गुजरेगी तभी आंख खुलेगी? 
    अभी अभी एक वीडियो वायरल हो रही है,  जिसमें एक ब्राह्मण, सवर्णों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए, वीडियो के द्वारा पिछड़ों को भी सबक सिखाने के लिए गोली तक मारने की बात कर रहा है।
  ऐसे कुकृत्य का हम विरोध करते हैं, लेकिन यह भी सच है कि, शोषण और अपमान की क्रिया के बराबर प्रतिक्रिया होने का एहसास होने से ही ज्यादातर अपराध रुकते हैं।
      विशेष रूप से यादव बन्धुओं, भगवान भरोसे नहीं, अब संविधान भरोसे आप का मान-सम्मान बचेगा।
  इसीलिए, संविधान को बचाने के लिए, आप भी उठा लो श्रीकृष्ण की डंडी और सिखा दो, इन ईन्द्र मनुवादियों को!
  *साथियों, आश्चर्य तब और होता है जब हमारे ही शूद्र भाई (SC. ST. OBC.) चाहे वह कर्मचारी है, अधिकारी है, नेता है, मंत्री है, मुख्यमंत्री है,यहा तक कि राष्ट्रपति ही क्यो न हो,  तरह तरह से अपमान झेलने को मजबूर हैं। यह जानते हुए भी कुछ मौकापरस्त स्वार्थी, इसी ब्राह्मणवादी व्यवस्था को फलने-फूलने के लिए खाद-पानी दे रहे थे और आज भी दे रहे है। आज के हालात के जिम्मेदार ऐसे शूद्रों को, हम सभी अंजान, उन्हे जूते मारने की बजाय, स्वागत मे फूलो की माला पहनाने के लिए दौड़ पड़ते है। ऐसे शूद्रो को भी हम लोगों को समझाने की जरूरत है!* 
  *✊गर्व से कहो हम शूद्र है!✊* 
              शूद्र एकता मंच
       आप का समान दर्द का हमदर्द साथी!
   शूद्र शिवशंकर सिंह यादव
  मो०-7756816035