एपिसोड, "शूद्रो का राजनीतिक दुश्मन कौन?"पर कुछ साथियों की सार्थक प्रतिक्रिया

🔥32वां एपिसोड,शाम,दिनांक 02-05-2020🔥
🔥एपिसोड, "शूद्रो का राजनीतिक दुश्मन कौन?"पर कुछ साथियों की सार्थक प्रतिक्रिया🔥
[30/04, 9:00 AM] +91 99076 10659: 💐माननीय शिवशंकर सर जी! नमो बुद्धाय, जय फुले, जय भीम,सर जी मैं एक मामूली इंसान हूँ और आप एक जागरूक क्रांतिकारी महापुरुषों के बताये हुए मार्ग के सच्चे सिपाही हैं। आपकी विचार धारा बहुत ही अच्छी हैं और आपके विचारों से यदि 100 मनुष्यों में से, एक भी मनुष्य  जागरूक होता हैं तो, घाटा नहीं बल्कि आपकी कोशिश मेहनत से महापुरुषों के मिशन में एक और स्टार सिपाई जुड़ जाएगा।, सर जी मेरे जिन विचारों को आपने सराहा, लाइक किया, उसके लिए सर धन्यवाद। 
     सर मेरा मानना है कि, जिन वृक्षों से छाया व फल न मिले तो, हटा कर नये वृक्षों को लगाना चाहिए। वैसे ही जो बहुजन नेता कुर्सी को घेर कर बैठे हैं और समाज का कुछ भला नहीं कर रहे हैं, उनसे समाज कुर्सी खाली करवा के नये कैडराइज जागरूक क्रांतिकारी नेताओं को कुर्सी दिलवाए। एक बात और है, अपनी जाति छुपाकर कोई क्रांति नहीं कर सकता। जाति छुपाने से कोई महान नहीं, बल्कि महान सोच विचार रखने से महानता का जन्म होता हैं। महापुरुषों ने अपनी जाति नहीं छुपाई, फिर ना जाने क्यो लोग,? अपनी जाति को छोटी या हीन समझते हैं। बैसे तो सभी मनुष्य एक ही है और सबकी जाति धर्म मानवता, इंसानियत एक ही है। लोगों को मैसेंज तभी अच्छा दे सकते हैं, जब लोगों को लगे कि, हां भाई, इस वर्ग में भी इतने महान लेखक, विचारक, क्रांतिकारी नेता हैं। जिन मनुवादियो ने जिस समाज वर्ग को छोटा बताया, उसी समाज के लोग, आज उनके सामने बड़े दिखाई दे। तब लोगों को समझ में आएगा कि, कोई जाति छोटी बड़ी  नहीं, कर्म महान होता हैं। कर्म से इंसान बड़ा होता है। 
   आज हर क्षेत्र में कैडर की जरूरत है। सिर्फ नारा लगाने से या गरीबों को एक दिन खाना खिलाने के बहाने विडियो सेल्फी दिखाकर, क्या आप और हम महान बन सकते हैं? सेवा, निष्काम, निस्वार्थ भाव से होनी चाहिए। क्या गरीबों, ज़रूरतमंदों की सेवा मदत, विना फोटो सेल्फी की नही हो सकती हैं। बस यही पर इंसान अपना चरित्र छोटा कर लेता है और लाचार, बेबस, मजबूर लोगों को भी विज्ञापन बना देता है। क्यो कि उसे सेवा से ज्यादा अपनी बांह बाही  लूटनी है। बुध्द कहते थे कि, एक दिन ऐसा समय आएगा कि इंसान अपनी पद कुर्सी के लिए, माता पिता को भी विज्ञापन बना के बीच चौराहे पर बेचेगा।
   आज हालात ऐसे हैं कि, समाज मौहल्ले से दस वोट भी नहीं है, फिर भी मौहल्ले से चार चार उम्मीदवार, एक योग्य समाज सेवी, क्रांतिकारी, लायक नेता के विरोध में खड़े हो जाते है। बिल्ली की तरह खाएंगे नही तो, लुडकाएगे जरूर। इसी लिए आज समाज को जरूरत से ज्यादा, जागरूक करने, और समाज में परिवर्तन बदलाव की जरूरत है।
   धन्य है! आप सभी समाज के जागरूक, क्रांतिकारी, वीर सिपाहियों और महान  वीरांगनाओं! जो अपनी परिश्रमी सेवा समाज को जागरूक करने में लगा रहे हैं। आप जैसे लोग समाज को जागरूक करने में लगे हैं। आप सभी लोगों की मेहनत जरूर रंग लाएगी। सभी मूल-निवासी भाई बहनों को सहयोग के लिए धन्यवाद! ऐसे ही प्रयास से एक दिन जरूर, शूद्र समाज अपने सही हक और अधिकार को पाएगा। 


[30/04, 9:20 AM] Gujar Radheshyam: मान्यवर शिवशंकर सिंह जी यादव साहब यही एक बिमारी है, हमारे समाज के नेताओं की।।।।।कि वो सत्ता मिलते ही मनुवादियों की तो झुठन खाने को तैयार रहते हैं, परन्तु हमारे समाज के साथ बैठने में भी शर्मिन्दगी महसूस करते हैं।
जय मूलनिवासी।बहुजन समाज।


[30/04, 1:21 PM] Ramesh Chandra: आप के लेख और विचार पढ़कर उर्जा आ जाती है। यही आपकी जीत है आपको बहुत बहुत धन्यवाद। हम कुछ लोग मिलकर शूद्र के अंदर जाति विहीन समाज की स्थापना कर अंतर जातीय विवाह करने पर कार्य कर रहे हैं, यदि आपकी सहमति हो ‌तो मै आपको उस ग्रुप मै जोड़ सकता हूं। आप की योग्यता ,अनुभव और क्षमता का लाभ ग्रुप को मिल सकता है।


  प्रस्तुति- शूद्र शिवशंकर सिंह यादव
              मो०- 7756816035


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