*गौतम बुद्ध के शोध का सारांश....* 👉 चार आर्य सत्य

*गौतम बुद्ध के शोध का सारांश....*


👉 चार आर्य सत्य (Four noble truth) 


1. दुनियाँ में दुःख है।
2. दुख का कारण है। 
3. दुख का निवारण है।
4. दुःख के निवारण का उपाय है ।


👉 मानवमात्र के दुखों की मूल वजह मानवीय विकार है। 
इंसान मोह-माया , लोभ-लालच, अहंकार, निंद्रा, तंद्रा, भय, क्रोध, आलस्य, दीर्घसुत्रता, तृष्णा, काम-वासना ईत्यादि में फंसकर दुखी होता है।
इससे छुटकारा पाने के लिए मनुष्य को अपने जीवन में *पंचशील* धारण करना चाहिए। मनुष्य को जीवन में मन, कर्म और वचन से *पंघशील* का निर्वहन करना चाहिये। पंचशील निम्नांकित है :-
1. हिंसा नहीं करना
2. झूठ नहीं बोलना। 
3. चोरी नहीं करना।
4. व्यभिचार नहीं करना।
5. नशापान नहीं करना


इसके अलावा अपना गृहस्थ जीवन विघ्नरहित और सम्मानजनक तरीके से कटे, इसके लिए जीवन में अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग) अपनाना चाहिए।
अष्टांगिक मार्ग निम्न हैं:-


1. सम्यक दृष्टि (सही समझ), 
2. सम्यक संकल्प (सही विचार, दृष्टिकोण) 
3. सम्यक वाणी (सही वाणी) , 
4. सम्यक कर्मांत (सही कार्य, Right action) , 
5. सम्यक आजीविका (सही आजीविका, सम्मानजनक उपार्जन के श्रोत), 
6. सम्यक व्यायाम (हल्का शारीरिक क्रियाशीलता वाला कार्य) 
7. सम्यक स्मृति (सही सजगता) और 
8. सम्यक समाधि (सही एकाग्रता, विपसना ध्यान के जरिये) ।


*बुद्ध के कुछ अनमोल ज्ञान :-*


👉 इस ब्रह्मांड को चलानेवाला कोई नहीं है और 
न ही कोई बनाने वाला या खत्म करने वाला है।


👉 न तो ईश्वर है और न ही आत्मा।


👉 जिसे लोग आत्मा समझते हैं, वह चेतना का प्रवाह है, 
यह प्रवाह कभी भी रुक सकता है।


👉 भगवान और भाग्यवाद कोरी कल्पना है,
जो हमें जिंदगी की सचाई और असलियत से अलग कर दूसरे पर निर्भर बनाती है।


👉 पांचों इंद्रियों की मदद से जो  जानकारी, अनुभूति मिलता है,  उसी को बुद्धि मान लिया जाता है। असल में बुद्धि ही जानती है कि क्या है और क्या नहीं। बुद्धि से ही यह समस्त संसार प्रकाशवान है।


👉 न यज्ञ से कुछ होता है और न ही धार्मिक किताबों को पढ़ने मात्र से.. 
धर्म की किताबों को,
गलती से मुक्त मानना ना समझी है !
 
👉 पूजा-पाठ से पाप नहीं धुलते.. 


👉 जैसा मैं हूं, वैसे ही दूसरा प्राणी है जैसे दूसरा प्राणी है, वैसा ही मैं हूँ,
इसलिए न किसी को मारो, न मारने की इजाजत दो..! 


👉 किसी बात को इसलिए मत मानिये कि दूसरों ने ऐसा कहा है या यह रीति-रिवाज है या बुजुर्ग ऐसा कहते हैं या ऐसा किसी धर्म प्रचारक का उपदेश है। 
मानो उसी बात को, जो कसौटी पर खरी उतरे !!! 


👉 कोई परंपरा या रीति-रिवाज अगर मानव कल्याण के खिलाफ है, तो उसे मत  मानिये।


👉 खुद को जाने बगैर आत्मवान नहीं हुआ जा सकता., 
निर्वाण की हालत में ही खुद को जाना जा सकता है।


👉 इस ब्रह्मांड में सब कुछ क्षणिक और नश्वर है, कुछ भी स्थायी नहीं  है। 
सब कुछ लगातार बदलता रहता है और नष्ट होता रहता है।। 


👉 एक धूर्त और खराब दोस्त जंगली जानवर से भी बदतर है, 
क्योंकि जानवर आपके शरीर को जख्मी करेगा, जबकि खराब दोस्त दिमाग को जख्मी करेगा..


👉 आप चाहे कितने ही पवित्र और अच्छे शब्द पढ़ लें या बोल लें, लेकिन 
अगर उन पर अमल न करें, 
तो कोई फायदा नहीं! 


👉 सेहत सबसे बड़ा तोहफा है, 
संतुष्टि सबसे बड़ी दौलत और वफादारी सबसे अच्छा रिश्ता है।


👉 हजारों लड़ाईयां जीतने से बेहतर खुद के मन पर जीत हासिल करना है, ताकि आप नियंत्रित रह सकें। 


👉 इंसान को गलत रास्ते पर ले जानेवाला उसका अपना सोंच (दिमाग) होता है,
न कि उसके दुश्मन.. 


👉 गुस्से के लिए आपको सजा नहीं दी जाएगी,
बल्कि खुद गुस्सा, आपको सजा देगा..


नमो बुद्धाय। 
🙏🙏🙏🙏🙏🌹


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