शूद्रो का मरा जमीर, जगाना ही होगा

🔥15वां एपिसोड,सुबह,दिनांक 24-04-2020🔥
*🔥शूद्रो का मरा जमीर, जगाना ही होगा🔥* 
   साथियो, पता नही क्यो, मुझे ऐसा लगता है कि, स्वतंत्रता के 70 साल बाद भी , समता, समानता, बन्धुत्व और वैज्ञानिक सोच पर  आधारित सम्विधान, जो मूलतः 85%  शूद्रो के हक और अधिकार की ही बात ज्यादा करते आ रहा है। इसके बावजूद भी  आज के देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दुर्दशा के लिए कुछ हदतक ब्राह्मणो से ज्यादा शूद्र ही जिम्मेदार नजर आ रहे है।
  *मै देख रहा हू कि शूद्रो मे ,आपस मे ही एक दूसरे से उच्च होने की  जाति की उच्चता का घमंड सभी को है लेकिन ब्राह्मण से नीच होने का दर्द  किसी को भी नही महसूस होता है। अब तो बड़े बड़े महापुरुषो की जिनकी अब तक जाति नही मालूम थी ,पूरा शूद्र समाज मान सम्मान देता था उसकी भी जाति खोजकर अपने-अपने प्रदेश मे जाति सरनेम लगाना शुरू कर दिया है। कुछ उदाहरण जैसे सोशल मीडिया मे नाम देखा  रामास्वामी नायकर पाल तथा कुछ समय पहले दिनांक 05-01-2020 को, वाराणसी में माता सावित्री बाई फुले की शानदार जयंती मनाई गई थी, मुझे एक पाल भाई साहब से ही मालूम पड़ा कि,४-५ पाल बिरादरी के शूद्र वहां गये थे , लेकिन बैनर पर रामास्वामी नायकर का फोटो नहीं लगने से नाराज़ होकर प्रोग्राम का आनंद लिए बिना वापस लौट गए थे। यह जानकार बहुत अफशोस हुआ। एक सवाल है,अभी तक आप कहां सोए थे। पाल पेरियार की विरासत भी एक यादव ललयी सिंह यादव कैसे ले लिया? अपनी जाति के बन्धन मे रखना तो चाहते है लेकिन उनके विचारो को अमल नही करना चाहते है। क्या सभी पाल विरादरी अपने अपने घरों से तथाकथित भगवानों, देवी देवताओं को बाहर कर दिया है?जबतक आप यह नहीं कर पाते हैं तबतक सिर्फ जातीयता के कारण उनपर अधिकार जमाने का भी आप का हक नहीं है। वही दूसरी तरफ पेरियार ललई सिंह यादव जिनकी जयन्ती बहुत से संस्थाओ ने मनाया। लेकिन मुम्बई मे 40-50 यादव समाज की रजिस्टर्ड संस्थाए है, किसी ने भी उनकी जयन्ती नही मनाई। जानते है मूर्खता भरा कारण क्या है । वह अब यादव नही है मरने से पहले बौद्ध धर्म अपना लिया था। यह भी सही है कि मान्यवर कांशीराम जी ने पेरियार रामास्वामी नायकर और पेरियार ललई सिंह यादव को  इतिहास मे फिर से जिन्दा किया।* 
   बहुत से साथी करीब चार साल से " *गर्व से कहो हम शूद्र है "* मिशन से सिर्फ यही एहसास दिलाना चाहते है कि ,शूद्रो आप हर कसौटी पर ब्राह्मण से उच्च है, लेकिन समझने के बाद भी, पता नही क्यो, उसे इसमे मजा नही आता है। कूआं के मेढक की तरह कूदकर फिर से जाति की उच्चता और नीचता की मानसिकता मे ही मजा लेने लगता है।
   *साथियो सिर्फ आप, अपने आप को ज्यादा नही,  सिर्फ  200 साल पहले अपने पूर्वजो के जगह पर अपने-आप को रख कर महसूस कीजिए, दर्द का एहसास कीजिए, चौबीस घंटे सिर्फ काम ही काम वह भी सिर्फ पेट पर , रात दिन खून पसीना बहाकर, जीवनोपयोगी बस्तुओ का उत्पादन कर, सभी प्राणी जाति की इमानदारी से सेवा करते आ रहे है। खुद आत्मनिर्भर होकर देश व समाज की सभी धरोहर को बनाते और सम्हालते आ रहे है। देश और समाज को सब कुछ दिया है, कभी बदले मे कुछ मिला  नही। क्या आप का जमीर यह सब जानने के बाद भी मानने को  तैयार है कि आप के पूर्वज नीच दुष्ट पापी थे।* 
 सच्चाई है नही थे, तो कबतक इस अपमान को खुद सर पर ढोते रहोगे और फिर आने वाले जनरेशन को भी ट्रांसफर करते रहोगे? कबतक? 
  *आज आप को सिर्फ मनुवादी संविधान की याद कोई दिलाता है तो आप, अपना आपा खो बैठते हो, सोचिये ,कल्पना कीजिए,  जिनपर यह व्यवस्था गुजरी होगी,उनका क्या हाल रहा होगा, सोचकर ही रोंगटे खडे हो जाते है।* 
  संविधान संरक्षण से जब आज कोई आप को अपशब्द कह देता है तो आप बौखलाहट मे बदला लेने की सोचने लगते है, लेकिन वही जब पूरे शूद्र समाज को कलंकित करते हुए सैकड़ो साल पहले नीच दुष्ट कहा  और दुर्भाग्य से मजबूरी मे अज्ञानता बस उन्होंने स्वीकार कर लिया ,जो आगे चलकर एक खणयंत्र के तहत धार्मिक परम्परा बना दी गई, जो आजतक जारी है।
  *आज हम सभी जानते है कि यह हमारे लिए अभिशाप व कलंक है। यह भी सही है कि शूद्र जबतक नीच बना रहेगा, तबतक उसके अंदर आने वाली सभी जातिया भी नीच बनी रहेंगी। यह प्रवृत्ति आप के द्वारा ही पोषित है, सीधे अब ब्राह्मण आप को नीच नही कहता है। आप खुद ही ऐसी मानसिकता से ग्रसित है।* 
  अब समय की पुकार है कि, अपने दादा -परदादा के अपमान का बदला लेने के लिए, वर्तमान मे अपने मान-सम्मान के लिए और भविष्य मे हमारे बच्चो को ऐसी जलालत न देखना पडे, इसके लिए सिर्फ और सिर्फ अपनी मानसिकता को बदलना ही होगा।
  *इसके लिए न तो आप को कोई धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह, मोर्चा और नतो धन दौलत की ही जरूरत है। किसी को कोई तकलीफ देने की भी जरूरत नही है। सिर्फ विचार परिवर्तन करना है। आत्मसम्मान से बढ़कर कुछ भी नही है।* 
  शुद्र होने का गर्व खुद महशूस करे। यदि आप का कोई साथी या दोस्त ब्राह्मण है तो उससे बडे प्यार से निस्संदेह पूछिए कि, सर आप उच्च और मै नीच कैसे हो गया, जरा आप हमे समझाइए। तार्किक सवाल जबाब कीजिए। इससे आप का कॉन्फिडेंस मजबूत होगा और ब्राह्मण से उच्च होने का एहसास भी प्रबल होगा।
 *आप सभी के विचारो मे  परिवर्तन के लिए शुभकामना!* 
   आप का समान दर्द का हमदर्द साथी!
  *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
   मो0-  W-  7756816035


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