शूद्रों का मरा जमीर जगाना ही होगा" पर एक साथी की सार्थक प्रतिक्रिया

🔥22वां एपिसोड,शाम,दिनांक 27-04-2020🔥
🔥हमारे 15वें एपिसोड "शूद्रों का मरा जमीर जगाना ही होगा" पर एक साथी की सार्थक प्रतिक्रिया🔥
   🔥आपने सही कहा गुरुजी(गुरुजी इसलिए संबोधित कर रहा हूँ, क्योंकि मैं आपसे बहुत कुछ सीखता हूँ).., *ज़मीर जगाना होगा..*
लेकिन ज़मीर जगाने के लिए ज़मीर होना भी तो चाहिये..???
ये वो समाज है जिसके उत्थान के लिए पिछले ढाई हजार सालों में कितने ही महापुरुष इन्हें समझा-समझा के दिवंगत हो गये, लेकिन ये नाली के कीड़े समान आज भी नाली(सनातन/हिन्दू धर्म की ग़ुलामी) में ही मस्त हैं..
ग़ुलामी इनकी रगों में ही नहीं इनके ज़ीन में है। जिसका असर इनकी मानसिकता पर साफ देखा जा सकता है तो, उसे ये इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकते हैं..???
लाख मंदिरों में पीटे जाएं, लाख इनकी चमड़ी उधेड़ी जाए, लाख इनकी बहू-बेटियों की अस्मत उछाली जाए, लाख इनको सामाजिक,आर्थिक व राजनैतिक समता से वंचित रखा जाए, लाख इनके हक़ों को इनसे छीना जाए, लाख इनको नीचता का एहसास कराया जाए, लेकिन ये अपनी ग़ुलामी/ वफ़ादारी उन्हीं से निभाएंगे। मजाल जो अपने समाज के बारे में जरा भी सोच लें..तो ज़मीर जागेगा कहाँ से..इतना सब सहन करने की शक्ति है, इन मानसिक गुलामों हरा० (संविधान द्वारा हक़ पाए और वफ़ादारी सनातनियों से जो सदियों से इन्हें समस्त मानवीय अधिकारों से वंचित रखे) में तो इनका ज़मीर बचा ही कहाँ..??? ये तो बस अपने बीवी-बच्चों सहित उनके ग़ुलाम हैं और आगे भी पीढ़ियों तक ग़ुलाम ही रहेंगे..
कहने को 85% हैं लेकिन समस्त संवैधानिक अधिकारों के बाद भी आजतक केंद्र में कभी अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बना पाए..और बना पाएं भी कैसे..???
85% होते हुए भी 6743 टुकड़ों में विभाजित..कभी एक होने का दुस्साहस ही नहीं कर सके। अपनी ही जातियों में उंच-नीच की अकड़ में.. ऊपर से तलवे चाटने से फुर्सत मिले अपने ही समाज को नीचा दिखाने से फुर्सत मिले तब..
37% वोटों के साथ सरकार बन जाती है और हम 85% हैं फिर भी 3% वाला हम पर शासन करता है और हम बस घंटे बजाने में मस्त रहते हैं..


मेरा उद्देश्य किसी को आहत करना नहीं है इसलिए अपनी सकारात्मकता का परिचय दें..धन्यवाद।


                 ---अशोक रत्न गौतम


 प्रस्तुति- शूद्र शिवशंकर सिंह यादव
             मो०-7756816035