हमें क्यों लगता है कि मुस्लिम शासक बहुत क्रूर थे, या और भी जो बुराइयां जिसे जो समझ आयें, इसीलिए हमें उनकी बनाई इमारतें तोड़ देनी चाहिए और किताबों से उनके नाम हटा देने चाहिए । ऐसा करके आप इतिहास से उन्हें समाप्त कर देंगें और हिन्दू राजाओं या अंग्रेजों के गुणगान करेंगे 😀 लेकिन पुष्यमित्र शुंग, या मिहिरकुल या राजपूताना जैसे क्रूर शासकों को आप भूल जाते हैं क्यों ? आप ही बताइये कि कौन सा 'महान' राजा क्रूर नहीं था? किसी भी धर्म का ? और अंग्रेजों से ज्यादा क्रूर कौन रहा है? लेकिन उनके बनाये किसी इमारत से आपको को कोई दिक्क़त क्यों नहीं होती है ? अगर आप इतिहास को आज के लोकतंत्र के हिसाब से तौलेंगे तो पूरा इतिहास और हमारी पूरी संस्कृति क्रूरता से भरी हुई ही है । आज के भारत के हिसाब से देखेंगे तो इतिहास के सारे 'हिन्दू' राजा भी अपने ही देशवासियों को मारते-काटते थे आपस में ही बहुत लड़ाईयां हुई हैं, और ऐसी लगभग हर लड़ाई या युद्ध राजा लोग किसी धर्म को बचाने के लिये नही बल्कि अपना राज्यक्षेत्र बढ़ाने के लिए ज़्यादा करते थे । हर राजा तानाशाह, राज्य का सर्वेसर्वा, और जनता पर अधिकाधिक कर लगाने वाला होता है! हाँ कुछ थोड़े कम क्रूर तो कुछ बहुत ज़्यादा होते हैं । बस इतना ही अंतर हो सकता है। इसका मतलब ये नहीं कि इतिहास में इन सनकी, क्रूर शासकों द्वारा बनायी गयी इमारतों को वर्तमान में सज़ा देकर हम इतिहास बदल देंगे। याद रखिये कि हर बड़ी ऐतिहासिक इमारत कुछ गरीब मजदूरों के खून-पसीने से ही बनी है! किसी इंसान के प्रति नफ़रत को निर्जीव इमारतों पर उतार कर क्या हासिल हो जायेगा? संसद भवन अंग्रेजों ने बनवाया । राष्ट्रपति भवन भी अंग्रेजों ने बनवाया। गेटवे ऑफ़ इंडिया भी अंग्रेजों ने ही बनवाया और इंडियागेट भी अंग्रेजों ने बनवाया है। जब इनसे कोई आपत्ति नही तो ताजमहल और लाल किला से क्यों? ख़ुद को बदलिये इतिहास नहीं! इतिहास पर हमारा या किसी का कोई वश नही चलता है उससे सीखा जाता है। अच्छा ये बताइये कि इतिहास में आपने ये नही पढ़ा क्या कि आर्य (आज के हिन्दू) भी बाहरी आक्रमणकारी थे ? 😀 ✍🏻